उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने गुरुवार को कैबिनेट मीटिंग में एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए इलेक्ट्रिक वाहन नीति को मंज़ूरी दी है. सरकार के इस फैसले के तहत राज्य में इलेक्ट्रिक वाहन की खरीद पर एक लाख रुपये तक की छूट दी जाएगी। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहन संबंधी कारोबार को बढ़ावा देने के लिए भी नीति तैयार की गई है। इस नीति के तहत 50,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा और दस लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
नई नीति का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग को प्रोत्साहित करना और उसके लिए अनुकूल ईको-सिस्टम के सृजन के लिए एक ढांचा खड़ा करना है। नीति के के तहत चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं के निर्माण को बढ़ावा देना, इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग को प्रोत्साहन देना और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी विनिर्माण को प्रोत्साहन देना है।
नीति की के अंतर्गत हर जनपद में न्यूनतम 20 चार्जिंग स्टेशन एवं 05 स्वैपिंग स्टेशन स्थापित किये जायेंगे। चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के लिए निवेश के तालमेल और सुविधा के लिए इन्वेस्ट यू0पी0 को नोडल एजेंसी के रूप में नामित किया जाएगा। चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं के निर्माण के प्रोत्साहन के तहत समस्त स्वीकृतियां अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त की अध्यक्षता में गठित प्राधिकृत समिति इन्वेस्ट यू0पी0 की सिफारिशों पर जारी की जाएगी।
नीति की अधिसूचना के 03 वर्ष के भीतर उत्तर प्रदेश में खरीदे और पंजीकृत किए गए इलेक्ट्रिक वाहनों पर 100 प्रतिशत की दर से छूट प्रदान की जाएगी। चौथे और पांचवें वर्ष में उत्तर प्रदेश में विनिर्मित, खरीदे और पंजीकृत इलेक्ट्रिक वाहनों पर 100 प्रतिशत की दर से छूट प्रदान की जाएगी।
इस नीति से रोजगार सृजन बढ़ेगा, सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों का विकास होगा और फॉरेन एक्सचेंज की बचत के साथ प्रदेशकी जी0डी0पी0 पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। नीति से यूपी में लगभग 30 हजार करोड़ रुपये का निवेश होने की सम्भावना है। इस नीति से 01 लाख व्यक्तियों के लिए प्रत्यक्ष रूप से और 05 लाख व्यक्तियों के लिए अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार सृजन होंगे।

