लखनऊ। ज्ञानवापी कार्बन डेटिंग मामले (Gyanvapi Carbon Dating Case) में आज 14 अक्टूबर शुक्रवार को वाराणसी की जिला अदालत फैसला सुनाएगी। अदालत ने इससे पहले दोनों पक्षों को सुनने के बाद 11 अक्टूबर को फैसला सुरक्षित रखा था। अदालत आज यह तय करेगी कि कार्बन डेटिंग या वैज्ञानिक विधि से ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग की जांच करानी है या नहीं?
बता दें कि ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग रूपी पत्थर को हिंदू पक्ष शिवलिंग बता रहे हैं। वहीं मुस्लिम पक्ष उसको फव्वारा बता रहा है। हिंदू पक्ष ने अदालत से मांग की थी कि शिवलिंग की जांच के लिए उसकी कार्बन डेटिंग कराई जाए। जिससे कि उसकी उम्र का पता चल सके। इससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए। ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग के कार्बन डेटिंग की मांग ज्ञानवापी परिसर में पूजा के लिए याचिका दायर करने वाली चार महिलाओं ने की है। इसकी सुनवाई वाराणसी के जिला जज डॉ0 अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत हो रही है।
इस साल मई 2022 में ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे किया गया था। जिस पर हिंदू पक्ष ने दावा किया था कि मस्जिद के वजूखाने के बीच एक शिवलिंग मिला है। जबकि मुस्लिम पक्ष उसको फब्वारा मान रहा है। ऐसे में अब याचिकाकर्ता महिलाओं की मांग है कि शिवलिंग की कार्बन डेटिंग के साथ ही उसकी वैज्ञानिक जांच भी कराई जाए। इसी के साथ यह भी सुनिश्चित हो कि शिवलिंग को किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए।
जिस कार्बन डेंटिंग की बात की जा रही है उसके बारे में जानने की लोगों में काफी उत्सुकता बनी हुई है। कार्बन डेटिंग से किसी भी वस्तु की उम्र और उसके समय निर्धारण का पता किया जाता है। कार्बन डेटिंग से 20 हजार साल पुरानी वस्तुओं की उम्र का भी पता लगाया जा सकता है। कार्बन डेटिंग विधि की खोज 1949 में हुई थी। इसलिए हिंदू पक्ष शिवलिंग की उम्र का पता लगवाने के पक्ष में है। पूरा मामला मस्जिद की दीवार से सटी श्रृंगार गौरी की पूजा अर्चना की इजाजत की मांग से शुरू हुआ जो अब शिवलिंग की कार्बन डेटिंग तक पहुंच गया है।

