मेरठ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव – पहले चरण और दूसरे चरण में हुए मतदान की हवा देखकर भाजपा के रणनीतिकारों को पसीना आ गया है। भागवा खेमे के भीतर चुप्पी है और भाजपाइयों और प्रत्याशियों के चेहरे की हवाइयां उड़ गई है। बता दें कि प्रदेश में 7 चरणों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। जिसमें पहले चरण में 11 जिलों की 58 सीटों पर मतदान हुआ था। जिसमें मुस्लिमों के मतों का ध्रुवीकरण करने में भाजपा की रणनीति फेल हो गई थी। मुस्लिम मतदाताओं की एकजुटता को तोड़ने में नाकाम भाजपा के उम्मीद थी कि वे दूसरे चरण के मतदान में पहले चरण की भरपाई कर सकेंगे। लेकिन मुस्लिम और दलित बाहुल्य इन 9 जिलों की 55 सीटों पर खूब साइकिल दौड़ी और हाथी चिंघाड़ा। यानी दूसरे चरण में भी भाजपा को पहले चरण जैसा ही झटका मतदाताओं ने दिया। इस कारण से भाजपा के छोटे चाणक्य काफी खफा हैं। दो चरणों की हवा ने जिस तरह से पसीना ला दिया है। उससे छोटे चाणक्य यह सोचने के लिए मजबूर हो गए हैं कि आखिर योगी ने मुख्यमंत्री होते पूरे 5 साल किया क्या प्रदेश में। पहले चरण के सर्वें के बाद छोटे चाणक्य ने जो अलग से एक सर्वें कराया वह पूरी तरह से भाजपा के खिलाफ माहौल वाला है। इससे भाजपा के भीतर सन्नाटा छाया हुआ है। प्रत्याशियों को पसीना आ गया, स्टार प्रचारकों के चेहरें की हवाईया उड़ गई है। बताया जाता है कि छोटे चाणक्य यूपी के एक बड़े अफसर से बहुत नाराज हैं। इन अफसर ने दिल्ली में अपने एक मीडिया साथी के जरिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह तक मैसेज पहुंचाया कि पहले और दूसरे चरण में भाजपा के पक्ष में जोरदार हवा चल रही है। जिस पर गृहमंत्री अमित शाह ने पूरी तरह से भरोसा कर लिया था। लेकिन जब दूसरे चरण का मतदान हुआ और उसके संभावित परिणाम लगाए गए तो गृहमंत्री अमित शाह समझ गए कि योगी आदित्यनाथ ने वह करामात कर दिखाई है जिसकी उनको उम्मीद नहीं थी। बात 2017 के विधानसभा चुनाव की करें तो भाजपा के पक्ष में बने माहौल में पार्टी के प्रत्याशी एक तरफा जीते। 2017 के विधानसभा चुनाव में पहले चरण से चली हवा आगे भी जारी रही और भाजपा की पूर्वाचंल तक बम बम रही। 2017 के इस परिणाम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की बांछे खिल गई थीं।
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लेकिन 2017 के बाद अब 2022 में हवाएं बदली हुई है। इस बार 2022 में मुस्लिम मतों का विभाजन नहीं हुआ और वो एकजुट हो गए। दलितों में भी सेंध लग गई। बात बदायु जिले की करें तो यह सपा का गढ़ माना जाता है। इस जिले में सपा के नाम पर किसी को भी चुनावी मैदान में उतार दिया जाए उसकी जीत निश्चित मानी जाती है। लेकिन 2017 में भाजपा का ऐसा जादू इस जिले में चला कि बदायूं जिले की 7 में 6 सीटें भाजपा के खाते में आ गई। इससे सपा भी चकित रह गई थी। वहीं 2019 में स्वामी प्रसाद मोर्य की बेटी संघमित्रा ने भी इसी जिले से इतिहास रच दिया था। हालांकि अब स्वामी प्रसाद मौर्य सपा में चले गए हैं। जबकि बेटी संघमित्रा की टीम के पूरी समर्थक बदायू में सपा की इमरान मसूद के साथ चुनाव में रहे। जिससे इस चुनाव का नक्शा बदल गया। धर्म सिंह सैनी जैसा कददावर नेता भी सपा में आ गया। जिससे सैनी वोटों पर इसका बहुत असर पड़ेगा। 2017 में 6 भाजपा ने जीती 2 सपा ने जीती थी। हालांकि अभी विधानसभा चुनाव का दो चरण ही पूरा हुआ है। अभी 5 चरणों का चुनाव बाकी है। लेकिन इतना तय है कि आने वाली 10 मार्च को चौकाने वाले नतीजे सामने आएंगे। भाजपा अपनी चुनावी रणनीति में पूरी तरह से फेल नजर आ रही है।

