-फरीद वारसी
जनसंघ के संस्थापक रहे श्यामाप्रसाद मुखर्जी के गृह राज्य पश्चिम बंगाल में तमाम तरह के हथकंडे अपनाने के बाद भी भाजपा विधानसभा चुनाव जीतने में नाकाम रही और इस तरह उसके दिल के अरमान दिल ही में गए। वहीं इससे पूर्व गत दो मई को मतगणना वाले दिन चुनावी रूझान अभी परिणामों में ही नहीं परिवर्तित हुए थे कि राज्य में हिंसा का दौर शुरू हो गया। भाजपा ने इस हिंसा के लिए तृणमूल कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए कोलकत्ता से लेकर दिल्ली तक शोर-गुल मचाना शुरू हुआ किया। वहीं टीएमसी ने भाजपा के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए भाजपा को ही हिंसा उकसाने के लिए जिम्मेदार ठहराया। ममता के शपथ समारोह में राज्य के राज्यपाल जगदीश धनखड़ ने नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री ममता को सलाह देते हुए कहा कि राज्य में कानून का राज स्थिापित करने के लिए वे जल्द कदम उठाएं। जिस पर असहज होते हुए ममता ने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता कोरोना से लड़ना है। दूसरा, मैं सभी दलों से आग्रह करती हूं कि वे सजग रहें, ताकि हिंसा पर काबू पाया जा सके। आज से मैं कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी अपने हाथ में लेती हूं। यहां ये बताते चले कि यह वही राज्यपाल घनकड़ हैं, जो संवैधानिक पद पर रहे हुए चुनाव से पूर्व व चुनाव के दौरान केंद्र के इशारे पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष की तरह काम करते रहे। यही कारण रहे कि ममता और घनकड़ के बीच रिश्ते कभी सहज नहीं रहे और मुख्यमंत्री और राजभवन के बीच हमेशा तनातनी बनी रही। जाहिर सी बात है कि जिस तरह से राजभवन राजनीति में लिप्त रहा उसे भला कौन मुख्यमंत्री स्वीकार करेगा। यही कारण रहे कि शपथ समारोह में एक बार फिर ममता और धनकड़ के बीच जबानों की जंग देखने को मिली। हालांकि इससे पूर्व, ममता ने लोगों से अपील की थी कि वे हिंसा में शामिल न हो। अगर कोई झगड़ा होता है तो वे पुलिस को सूचित करें।
वहीं इधर भाजपा हिंसा के लिए किस तरह फेक न्यूज का सहारा ले रही है, उसका एक शर्मनाक उदाहरण सामने आया। भाजपा ने सोशल मीडिया पर एक व्यक्ति का फोटो प्रसारित कर यह समाचार फैलाया कि टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने उसके कार्यकर्ता की हत्या कर दी। बाद में यह बात सामने आई कि वह भाजपा कार्यकर्ता नहीं बल्कि एक न्यूज चैनल का संवाददाता है, और वह भी जिन्दा। इस बात का खुलासा किसी और ने नहीं, बल्कि स्वयं संबंधित न्यूज चैनल ने ही कर भाजपा को बेनकाब करने का काम किया। अच्छा होगा कि गोदी मीडिया अब मोदी-भाजपा प्रेम से परे हट कर निष्पक्ष पत्रकारिता करे तो देश को इस बात की जानकारी मिलेगी कि कथित राष्ट्रवादी भाजपा के कारनामे और क्या-क्या हैं? बहरहाल, उपरोक्त झूठे प्रकरण से इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है कि हिंसा वास्तव में कर कौन रहा है, और दरअसल बदनाम किसे किया जा रहा है। इस बाद की पुष्टि बंगाल के स्थानीय लोग भी कर रहें हैं कि हिंसा के पीछे वास्तविक लोग कौन है और वहीं विड़म्बना देखिए क सहानुभूति हासिल करने के लिए हिंसा के विरोध में व ममता के खिलाफ देश भर में धरना दिया गया। हिंसा की जांच के लिए आनन-फानन में गृहमंत्रालय का एक जांच दल भी बंगाल रवाना हुआ जो सीधे राज्यपाल धनकड़ से मिला। अब इस जांच दल की रिपोर्ट में किसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा, यहां उसे लिखने की जरूरत नहीं है।
जहां तक बंगाल में हुई हिंसा का सवाल है तो बंगाल के लोगों द्वारा कहा और माना जा रहा है कि चुनाव में मिली हार की खीझ मिटाने के लिए हिंसा फैला कर एक साथ कई निशाने साधे जा रहे हैं। खुद को शहीद के रूप में पेश करते हुए जहां ममता और टीएमसी को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। वहीं सबसे बड़ा कारण यह है कि कोरोना काल में मोदी सरकार जिस तरह से अखिल भारतीय स्तर पर फेल साबित हुई है। उन सब से लोगों का ध्यान हटाने के लिए बंगाल में हिंसा की पटकथा लिखी गई। वैसे भी लोगों का ध्यान भटकाने के लिए भाजपा को महारत हासिल है। जिसका एक और रूप फिर से देखने को मिल रहा है। वहीं दूसरी ओर देश भर में कोरोना का कहर जारी है। रोज नए केस मिलने की संख्या चार लाख के आंकडें को पार कर चुकी है। अब तक मरने वालों की संख्या दो लाख तीस हजार से अधिक हो चुकी है। जिनके प्रति मोदी सरकार द्वारा सहानुभूति तो प्रकट नहीं की गई, बल्कि वह कृत्य किए जा रहे हैं जिससे मोदी सरकार बदनाम ही हो रही है। इलाज, दवा, इन्जेक्शन व आक्सीजन न मिलने लोग अस्पतालों और यहां तक सड़कों पर दम तोड़ रहे हैं। चारों तरफ हाहाकार मचा हुआ है। अफरा-तफरी का माहौल है। वातावरण में एक अजीब सा डर व खौफ प्रदर्शित हो रहा है। लोग डर-डर का जी रहे हैं और यह सब इसलिए हो रहा है कि सरकारी चिकित्सा तंत्र की पोल खुल चुकी है। जिसे पहली लहर आने के बाद जब मजबूत किए जाने की जरूरत थी। तो पहले बिहार और फिर बंगाल सहित पांच राज्यों के विधान सभा चुनावों में ऊर्जा, समय व धन बर्बाद किया जा रहा था। लगभग प्रतिदिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा मोदी सरकार को कड़ी फटकार सुनने को मिल रही है। लेकिन राहत की खबर कहीं से भी सुनने को नहीं मिल रही है। अब तो खुद भाजपा के सांसद और विधायक भी खुलकर उपरोक्त नाकामी के लिए अपने नेतृत्व के समक्ष सवाल उठाने लगे हैं। तो जाहिर सी बात है कि ऐसे माहौल में पीड़ित वर्ग की सोच सत्तारूढ़ सरकार के प्रति क्या होगी? इसकी भनक भाजपा को है और जो कहा जा रहा है वह सत्य प्रतीत हो रहा है कि समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए बंगाल में नया ‘खेला’ किया गया। दुखद तो यह है कि कोरोना के कारण मौत और जिंदगी से लड़ रहे आम लोगों को मोदी सरकार झटके पर झटके दिए जा रही है जिसके तहत पेट्रोल के दाम 100 रूपए से अधिक प्रति लीटर हो गए हैं। जिसका महंगाई और गरीब व मध्यम वर्ग पर क्या असर पड़ेगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। डीजल-पेट्रोल के दाम बढ़ने पर राहुल का यह कहना कि चुनाव खत्म लूट शुरू, उनके इस कथ से सहमत हुआ जा सकता है।

