मेरठ। इस समय प्रदेश के अधिकांश बिजलीघरों में कोयला संकट उत्पन्न हो सकता है। प्रदेश के बिजलीघरों में एक बार फिर से कोयले का संकट शुरू हो गया है। बिजली घरों को प्रतिदिन कोयले की करीब 15 रैक चाहिए होती है। जबकि अभी इन बिजलीघरों को 10—12 कोयले की रैक ही प्राप्त हो रही है। जिसके चलते आगामी मानसून के सीजन में प्रदेशवासियों को बिजली संकट से जूझना पड़ सकता है। इस समय प्रदेश के कई बिजलीघरों में एक सप्ताह का ही कोयला बचा हुआ है। इन बिजलीघरों को अगर अग्रिम कोयले की रैक नहीं पहुंचाई गई तो बिजली उत्पादन में बड़ी बाधा आ सकती है। उप्र के प्रमुख बड़े बिजली घर में सिगरौली पहले नंबर पर आता है। जहां पर बिजली बनाने में कोयले का उपयोग होता है। सूत्रों की माने तो सिगरौली में मात्र पांच दिन का कोयला बचा हुआ है। मानसून के दौरान बिजलीघरों में अगर कोयले की कमी हुई तो इसका असर निश्चित ही बिजली उत्पादन पर पड़ेगा।
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बता दें कि प्रदेश की योगी सरकार ने कोयला आयात करने से हाथ खड़े कर दिए है। जिसके बाद कोल इंडिया ने उप्र के बिजलीघरों में कोयले की आपूर्ति कम कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्र के हस्तक्षेप के बाद कोयला आपूर्ति में इजाफा हुआ था।लेकिन अब इसमें फिर कमी होनी शुरू हो गई है। अधिकारियों की माने तो बिजलीघरों में कम कोयला पहुंचने से मानसून के दौरान समस्या हो सकती है। वैसे बताया जाता है कि एनटीपीसी की बिजली उत्पादन इकाइयों के पास कोयले का अधिक भंडार है। जबकि उप्र की बिजली उत्पादन इकाइयों को कोयले की कमी से जूझना पड़ सकता है। उप्र को रोजाना मानक से पांच रैक कम कोयला मिल रहा है।

