लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) ने अपने एमएलसी और पूर्वांचल में बड़े ठाकुर चेहरा माने जाने वाले यशवंत सिंह को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है। गौरतलब है कि यशवंत सिंह समाजवादी पार्टी से आजमगढ़-मऊ निकाय सीट से एमएलसी चुने जाते रहे हैं। 2017 में भाजपा की सरकार बनने के बाद उन्होंने सीट छोड़कर पार्टी बदल ली थी। जिसके एवज में भाजपा ने उन्हें एमएलसी बनाया था। अब पांच साल बाद भाजपा ने उन्हें छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है। गौरतलब है कि आजमगढ़-मऊ से एमएलसी के चुनाव में भाजपा ने सपा विधायक के बेटे और अपने पूर्व विधायक अरूणकांत यादव को चुनाव में उतारा है। जबकि, यशवंत सिंह अपने बेटे विक्रांत सिंह रिशू की पैरोकारी कर रहे थे।
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टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय चुनाव लड़ाने का ऐलान कर दिया। जिसके बाद भाजपा ने अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने का आरोप लगाते हुए पार्टी से छह साल के लिए निलंबित कर दिया है। यशवंत सिंह को सीएम योगी आदित्यनाथ का करीबी माना जाता है। उनके निष्कासन के बाद आजमगढ़-मऊ की सीट पर चुनाव काफी दिलचस्प हो गया है। यूपी में भाजपा की 2022 के विधानसभा चुनाव में मिली जीत के बाद अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
सीट पर रही है बादशाहत
यशवंत सिंह की आजमगढ़-मऊ एमएलसी सीट पर बादशाहत रही है। हालांकि उनकी इस जीत में सपा का बड़ा योगदान रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के नाम पर सियासत करने वाले यशवंत सिंह मुलायम सिंह यादव के खास माने जाते रहे हैं। वह चंद्रशेखर के नाम पर एक ट्रस्ट भी चलाते हैं। हालांकि यूपी में सत्ता बदलती रहीं लेकिन यशवंत सिंह सपा में कायम रहे लेकिन 2017 में भाजपा की सरकार जब योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बनी तो उन्होंने पाला बदल लिया। उनको योगी का भी खास माना जाता है।
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दिलचस्प हो गई है सीट
आजमगढ़-मऊ की एमएलसी सीट (MLC seat) पर चुनाव अब काफी दिलचस्प हो गया है। क्योंकि इस सीट से भाजपा ने अरूणकांत यादव को प्रत्याशी बनाया है जो रमाकांत यादव के बेटे हैं। वहीं सपा प्रत्याशी ने शिकायत की थी कि रमाकांत यादव उनका सहयोग नहीं कर रहे हैं, जबकि रमाकांत ने अपनी विधानसभा क्षेत्र से जिताने का वादा किया है। ऐसे में यहां पर मामला अब त्रिकोणीय हो गया है। समाजवादी पार्टी यहां से जीत दर्ज कर भाजपा के साथ-साथ यशवंत सिंह को भी सबक सिखाना चाहती है।

