लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की सरगर्मी तेज हो गयो है और सभी पार्टियां अपनी चुनावी रणनीति पर काम कर रही है। वहीं 2017 चुनावों में 300 से ज्यादा सीटें जीतने वाली भाजपा भी प्रदेश में सपा और पश्चिमी यूपी में 3 कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों से निपटने के लिए नई रणनीति पर काम करती दिख रही है।
भाजपा के बड़े नेताओं की माने तो पार्टी पश्चिम में होने वाले नुकसान की भरपाई पूर्वांचल से करने की रणनीति बना रही है। पिछले एक महीने के घटनाक्रम को देखे तो पता चलता है कि तमाम योजनाओं का शुभारंभ और प्रधानमंत्री की बड़ी जनसभाओं की शुरुआत पूर्वांचल से ही हो रही है। हालांकि, भाजपा को केंद्र और राज्य द्वारा संचालित अपनी योजनाओं पर भरोसा है, लेकिन फिर भी पार्टी किसानों के 3 कृषि कानूनों के विरोध और आरएलडी (RLD) के बढ़ते जनाधार को देखते हुए सतर्क हो गई है।
Read also: यूपी : मायावती के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी भाजपा की बेबी रानी मौर्य
बतादे कि नोटबंदी के बावजूद भी पश्चिमी यूपी की 71 सीटों में से 52 सीटों पर भाजपा का कब्जा था। यूपी की राजनीति को लंबे अरसे से देखने वाले वरिष्ठ पत्रकार आरएम लाल के मुताबिक, भाजपा को इस बात का पूरा अंदाजा है कि पार्टी का प्रदर्शन पूर्वांचल में जितना ज्यादा अच्छा होगा, सूबे की सत्ता में उसकी वापसी उतनी ही आसान होगी। हालांकि, लाल के मुताबिक पश्चिमी यूपी में चल रहे किसान आंदोलन से बीजेपी को कुछ हद तक नुकसान हो सकता है। इसलिए भाजपा पूर्वांचल को साधने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। इसी के चलते पिछले कुछ दिनों से पीएम मोदी के दौरों सबसे ज्यादा पूर्वांचल में हो रहे है। वहीं पिछले सप्ताह तो मोदी लगातार दो बार पूर्वांचल में विभिन्न योजनाओं के उदघाटन के बहाने चुनावी माहौल बनाने आ चुके है। इसी क्रम में वो अगले माह 13 नवंबर को गृह मंत्री अमित शाह पूर्वांचल के आजमगढ़ में विश्वविद्यालय का शिलान्यास करने आ रहे है।
Read also: यूपी: लखीमपुर खीरी में मृत भाजपा कार्यकर्ताओं के परिवारों से मिले मंत्री ब्रजेश पाठक
गौरतलब है कि भाजपा के लिए राजनीतिक तौर पर पूर्वांचल और बुंदेलखंड के दो बड़े केंद्र हैं। जानकारों के मुताबिक किसान आंदोलन के चलते पश्चिमी यूपी में भाजपा का राजनीतिक समीकरण थोड़ा डगमगाता दिख रहा है। यही कारण है कि भाजपा अब अपना ध्यान पूर्वांचल को साधने में लगा रही है। दरअसल वोटबैंक के लिहाज से बसपा और सपा का पश्चिमी यूपी में बड़ा वोट बैंक है। वहीं भाजपा का पूर्वांचल की 160 सीटों में से 115 सीटों पर कब्जा है। इसी वजह से भाजपा पूर्वांचल पर ज्यादा फोकस कर रही है।

