लखनऊ। यूपी चुनावी दंगल 2022 – व्यापारियों की समस्याओं पर कल तक एक ही मंच से सरकार को घेरने वाले लखनऊ के कारोबारी चुनाव आया तो अलग-अलग रहा अपना चुके हैं। किसी ने समाजवादी पार्टी का दामन थामा है तो कोई भारतीय जनता पार्टी के लिए प्रचार प्रसार कर रहा है। स्थिति या है कि व्हाट्सएप ग्रुपो से लेकर सोशल मीडिया तक पर व्यापारी एक दूसरे पर आरोप और प्रत्यारोप लगाते हुए भी दिख रहे हैं। वही मांगे ना पूरी होने की वजह से कई लोगों ने नोटा दबाने की अपील भी की है। हालांकि इसकी संख्या बहुत कम है।
Read also: समाजवादी पार्टी के नेता समाजवादी नहीं तमंचावादी हैं : योगी आदित्यनाथ
भाजपा के साथ सबसे ज्यादा कारोबारी
हर बार की तरह इस बार भी भारतीय जनता पार्टी के साथ सबसे ज्यादा व्यापारी और व्यापार मंडल के लोग जुड़े हुए हैं। स्थिति यह है कि कल तक समाजवादी पार्टी के साथ चलने वाले कई बड़े व्यापारी नेता इस बार भाजपा के साथ खड़े दिख रहे हैं। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप बंसल जो कि सपा सरकार में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री हुआ करते थे उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया है। इसके अलावा लखनऊ व्यापार मंडल के चेयरमैन हरिश्चंद्र अग्रवाल महामंत्री अभिषेक खरे युवा नेता राहुल गुप्ता महामंत्री अमिताभ श्रीवास्तव वरिष्ठ उपाध्यक्ष उत्तम कपूर समेत कई व्यापारी भारतीय जनता पार्टी के लिए प्रचार प्रसार कर रहे हैं। इसमें से कई लोगों को भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव की जिम्मेदारी भी दी हैं।
सपा की भी संख्या में हुई बढ़ोतरी
मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के साथ भी लखनऊ समेत प्रदेश में बड़े स्तर पर व्यापारी नेता जुड़े हुए हैं। लखनऊ व्यापार मंडल के महामंत्री पवन मनोचा सुमित गुप्ता, व्यापार मंडल के युवा महामंत्री रहे अरविंद पाठक समेत कई लोग समाजवादी पार्टी के लिए प्रत्यक्ष तौर पर प्रचार प्रसार कर रहे हैं। पवन मनोचा ने तो कैंट विधानसभा क्षेत्र से खुद को प्रत्याशी बनाने की भी अपील की थी। लखनऊ में सपा के साथ जो कारोबारी जुड़े हैं उसमें से ज्यादातर मुस्लिम और पंजाबी समाज से है।
आए दिन व्हाट्सएप ग्रुप ऊपर होती है बहस
यह व्यापारी आए दिन व्हाट्सएप ग्रुप पर अपनी अपनी पार्टी का पक्ष रखते हुए कई बार आपस में ही बहस करते दिख जाते हैं। 2 महीने पहले तक व्यापारियों के मुद्दे पर सरकार को घेरने वाले यह कारोबारी मौजूदा समय में आपस में ही अपनी-अपनी पार्टियों के लिए कई बार लड़ते नजर आते हैं। जैसे ही कोई एक पार्टी का पक्ष रखता है उसके तुरंत बाद दूसरी पार्टी के समर्थक उसको काउंटर करते हैं।
नोटा दबाने की अपील
इस बीच में कई व्यापारी किसी भी पार्टी का समर्थन ना करते हुए नोटा दबाने की अपील कर रहे हैं। इसमें सबसे पहला नाम लखनऊ स्टेशनरी एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेन सिंह चौहान का है। जितेन सिंह चौहान पिछले दो चुनावों से नोटा के समर्थन में प्रचार प्रसार करते हैं। यहां तक कि वह पिछली बार इसके समर्थन में शहर में कई होल्डिंग्स भी लगवा चुके हैं। वही इस बार जो सबसे बड़ा नाम नोटा के समर्थन में आया है वह है लखनऊ व्यापार मंडल के वरिष्ठ महामंत्री और शहर के सबसे कद्दावर व्यापारी नेता माने जाने वाले अमरनाथ मिश्रा का। वैसे तो अमरनाथ मिश्रा आए दिन भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के साथ दिख जाते हैं लेकिन इस चुनाव में वह नोटा के समर्थन में दिख रहे हैं। इसकी मुख्य वजह बताई जा रही है मध्य विधानसभा क्षेत्र से भाजपा का प्रत्याशी। मध्य विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी ने रजनीश गुप्ता को प्रत्याशी घोषित किया है। रजनीश गुप्ता के परिवार और अमरनाथ मिश्रा के बीच में पुरानी अदावत है। ऐसे में अमरनाथ मिश्रा इस बार भारतीय जनता पार्टी के साथ खड़े होते नहीं दिख रहे हैं। दिक्कत यह है कि वह खुलकर समाजवादी पार्टी का भी समर्थन नहीं कर सकते हैं ऐसे में वह नोटा के समर्थन में खड़े नजर आ रहे हैं।
Read also: UP Election 2022: सपा साफ हो चुकी पार्टी है,बसपा भागने वाली है और कांग्रेस जर्जर इमारत: दिनेश शर्मा
सीमेंट कारोबारियों ने किया चुनाव का बहिष्कार
उत्तर प्रदेश सीमेंट स्टेशन के अध्यक्ष श्याम मूर्ति गुप्ता का कहना है कि उनकी समस्याओं को लेकर सरकार ने कोई काम नहीं किया है। ऐसे में सीमेंट स्टेशन से जुड़े हुए कारोबारी इस बार चुनाव का बहिष्कार करते हैं। उन्होंने लिखित तौर पर यह बयान जारी किया था।

