लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दो चरण पूरे हो चुके है लेकिन अभी भी 5 चरण शेष है जिसमें सभी दल अधिक से अधिक सीटें जीतने के लिए एड़ी चोटी का ज़ोर लगा रहे हैं। लेकिन कोर्ट के एक फैसले ने अगले चरणों के मतदान से पहले भाजपा के केंद्रीय नेत्रत्व की चिंता बढ़ा दी है। बतादे कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्रीय राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे और लखीमपुर खीरी हिंसा (Lakhimpur Kheri) मामले के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा (Ashish Mishra) को 130 दिन बाद जमानत दे दी है और वो अब जेल से बाहर है।
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इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने पिछले बृहस्पतिवार को आशीष मिश्रा को जमानत दी थी। इस फैसले से एक तरफ जहां केंद्रीय मंत्री टेनी का परिवार खुश है तो दूसरी तरफ यूपी बीजेपी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के होश उड़े हुए हैं। गौरतलब है कि चौथे चरण में 23 फरवरी को लखीमपुर और लखनऊ समेत उसके उसके आस-पास के क्षेत्रों में चुनाव होगा जिससे भाजपा को नुकसान हो सकता है।
गौरतलब है कि आशीष मिश्रा पर लखीमपुर में प्रदर्शन कर रहे किसानों को कुचलने का आरोप था जिसमें आज ही वो रिहा हुए है। बता दे कि पहले से ही पश्चिम यूपी और पंजाब के किसान भाजपा के तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे है। उसी के विरोध प्रदर्शन के दौरान लखीमपुर में यह दुखद घटना हुई थी। उसके बाद से क्षेत्र में किसानों का रुख भाजपा के प्रति नकारात्मक है।
हालांकि 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जिले की आठों (8) सीटों- पलिया, निघासन, गोला गोकरणनाथ, श्रीनगर, धौरहरा, लखीमपुर, कसता और मोहम्मदी पर जीत हासिल की थी। लेकिन इस बार किसानों की नाराजगी और लखीमपुर कांड के बाद समीकरण बदले हुए नजर आ रहे है। वहीं विश्लेषकों के मुताबिक पहले दो चरणों के मतदान के रुझान और जातीय समीकरण के आधार पर सपा गठबंधन का पलड़ा भरी नजर आ रहा है।
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गौरतलब है कि भाजपा को पश्चिम उत्तर प्रदेश और ब्रज क्षेत्र में पर पहले दो चरणों में 113 सीटों पर हुए मतदान में नुकसान का अनुमान है जबकि पिछली बार बीजेपी ने इसमें से 91 सीटे जीतकर प्रचंड बहुमत वाली सरकार बनाई थी।

