UP Chunav: टिकट नहीं मिला तो ऐसा छलका दर्द,कोई जी भरकर रोई तो किसी ने की आत्मदाह की कोशिश

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UP Chunav: टिकट नहीं मिला तो ऐसा छलका दर्द,कोई जी भरकर रोई तो किसी ने की आत्मदाह की कोशिश

मेरठ। UP Chunav – पहले चरण का चुनाव प्रचार अब चरम पर है। वहीं दूसरे चरणों के लिए राजनैतिक दल प्रत्याशियों के नाम की घोषणा कर रहे हैं। सबसे दिलचस्प बात जो देखने को मिल रही है वह यह कि पार्टी जब टिकट नहीं दे रही तो दावेदार तरह —तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। टिकट बंटवारे के बाद किसी खेमें में मिठाई बांटी जाती है तो किसी खेमें में खामोशी छाई रहती है। इस समय आमतौर पर सभी दलों में ऐसे चेहरे हैं जिनका दर्द टिकट नहीं मिलने पर झलक रहा है। पहले चरण का मतदान आगामी 10 फरवरी को है। जबकि दूसरे चरण के मतदान के लिए नामांकन शुरू हो चुका है।

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पहले चरण के चुनाव में भी कई दलों ने भावी प्रत्याशियों के टिकट काट दिए। मेरठ में भी भाजपा,रालोद और बसपा ने अपने भावी नेताओं के टिकट काटे। लेकिन सबसे अधिक घमासान रालोद में देखने को मिला। खासकर सिवाल खास सीट से लेकर बागपत तक बगावत हुई। इसी बगावत के बीच कुछ नेताओं ने पार्टी से त्यागपत्र भी दे दिया। इनमें रालोद के जिलाध्यक्ष राहुल देव प्रमुख हैं। टिकट नहीं मिलमने पर नेताओं ने भी कहीं रोने का नाटक किया तो किसी ने मारने तक की धमकी दे डाली। यह भी कहा जा सकता है कि टिकट नहीं ​मिलने पर नेताजी की निष्ठा पार्टी और शीर्ष नेतृत्व के ​लिए पल में बदल गई।

विधानसभा चरथावल से बसपा ने काफी समय पहले अरशद राणा को प्रभारी बना दिया था। लेकिन ऐन मौके पर टिकट की घोषणा होने से पहले अरशद का नाम काटकर किसी दूसरे को टिकट दे दिया गया। इसके बाद अरशद राणा ने पूरी बसपा की पोल खोलकर रख दी। उन्होंने थाने में रोते हुए बसपा सुप्रीमो मायावती पर गंभीर आरोप लगाए। इतना ही नहीं अरशद ने टिकट नहीं मिलने पर आत्महत्या की धमकी तक दे डाली।

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कुछ ऐसा ही हाल हुआ अलीगढ़ के पूर्व ब्लाक प्रमुख चौधरी तेजवीर सिंह का। जिन्होंने सपा से टिकट मांगा था। लेकिन सपा ने उनको टिकट नहीं दिया तो इनके समर्थक आदित्य जूनूनी ने सपा कार्यालय के बाहर आत्मदाह की कोशिश की। हालांकि बाद में इन्हें गिरफ्तार भी कर लिया गया।

भाजपा नेता सतीश शर्मा को मथुरा की मांग विधानसभा से पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो वे अपने को रोने से नहीं रोक सके। उन्होंने जहां भाजपा और पार्टी पदाधिकारियों पर धोखा देने के आरोप लगाए वहीं अपना त्यागपत्र भी दे दिया। गीता रानी शर्मा जो कि सरकारी नौकरी करती थी। उनको भी विधायक बनने का शौक लगा तो नौकरी छोड़कर कांग्रेस से टिकट की दावेदार हो गई। लेकिन जब कांग्रसे ने इसको टिकट नहीं दिया तो ये भी बागी हो गई और कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी की शान में जमकर कीचड़ उछाला। अपना दर्द बया करते हुए गीता शर्मा भी खूब रोईं।

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