Maharastra Politics Live: सामने आकर बोलो, मेरा इस्तीफ़ा तैयार है, बागियों को उद्धव का सन्देश

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महाराष्ट्र में दो दिन से मचे सियासी संकट और महाराष्ट्र विकास अघाड़ी सरकार के गिरने की ख़बरों के बीच आज शाम पहली बार शिवसेना प्रमुख और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे लोगों के सामने आये और फेसबुक लाइव के ज़रिये शिव सेना विधायकों और शिव सैनिको को सम्बोधित किया। इस सम्बोधन में उद्धव ने साफ़ तौर पर कहा कि वो कुर्सी से चिपकने वाले लोगों में नहीं हैं, जिन्हें यह लगता है कि मुझे मुख्यमंत्री नहीं बने रहना चाहिए वो मेरे सामने आकर बात करें और मुझसे कहें कि आप इस्तीफ़ा दे दीजिये, मैं उन्हें भरोसा दिलाता हूँ कि मुझे इस्तीफ़ा देने में ज़रा भी देर नहीं लगेगी

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उद्धव ठाकरे ने कहा कि गुजरात और असम जाने से पहले उन्हें पहले मुझसे बात करना चाहिए थी, मैं सत्ता का लोभी नहीं हूँ, न ही मुख्यमंत्री बनना चाहता था, यह तो परिस्थितियां ऐसे बनीं कि मुझे मुख्यमंत्री बनना पड़ा. उद्धव ने कहा ठाकरे परिवार ने कभी पद की परवाह नहीं की. मुझे भगवान् ने सबकुछ दिया है, मुख्यमंत्री भी बना दिया, लेकिन मुझे यह पद छोड़ने में ज़रा भी देर नहीं लगेगी। मैंने ने अपना मन बना लिया है.

उद्धव ठाकरे ने हिंदुत्व की बात पर कहा कि शिवसेना और हिंदुत्व को एक दुसरे से कभी अलग नहीं किया जा सकता। उन्होंने असली शिवसेना की बातों पर फटकार लगाते हुए कहा कि गुजरात और असम में बैठकर मेरी शिव सेना असली की बात कहने वालों तुन्हें शर्म भी नहीं आती ऐसी बातें करते हुए. लोकशाही में सारा खेल संख्या बल का होता है, क्या होगा जो मेरे पास संख्या बल नहीं है, सरकार तो आती जाती रहती है. 

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उद्धव ठाकरे ने यहाँ तक कहा कि अगर किसी शिव सैनिक को यह लगता है कि मुझे शिव सेना प्रमुख नहीं रहना चाहिए तो वह मुझसे बोल सकता है, बोल नहीं सकता तो मुझे पहने कर सकता है मैं इस पद को भी छोड़ने को तैयार हूँ, मैं एक सच्चा शिव सैनिक हूँ. उद्धव ने अपने सम्बोधन में इस बात पर भी अफ़सोस जताया कि मुझ पर एनसीपी को भरोसा है, कांग्रेस को भरोसा है लेकिन मेरे अपनों का ही जब मुझ पर भरोसा नहीं तो मैं क्या कर सकता हूँ. उन्होंने कहा किसी की निगरानी नहीं की जा सकती, अगर किसी को लघुशंका के लिए भी जाने पर उसपर नज़र रखी जाय तो ऐसे लोकतंत्र से क्या फायदा। उद्धव ने सवाल किया की लोग कह रहे हैं कि यह पहले वाली शिवसेना नहीं है, मैं पूछता हूँ कि बाला साहब की शिवसेना और आज की शिवसेना में क्या फ़र्क़ है?

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