चुनाव से पहले कांग्रेस को छोड़ने वाले नेताओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, अब इसमें दो नए नाम जुड़ गए हैं। एक नाम गौरव वल्लभ का है जिन्होंने आज ये कहते हुए पार्टी के सभी पदों और सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया है कि वो न तो सनातन विरोधी नारे लगा सकते हैं और न ही देश के उद्योगपतियों को गालियां दे सकते हैं. वहीँ दुसरे नेता महाराष्ट्र के संजय निरुपम हैं जिन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए 6 वर्षों के लिए निष्काषित कर दिया गया है, हालाँकि उनका दावा है कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफ़ा दिया है, वैसे निष्कासन के मामले में अक्सर ऐसी ही दलीलें दी जाती हैं।
गौरव वल्लभ ने कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को दो पन्नों का एक पत्र लिखकर अपना इस्तीफ़ा देने और इस्तीफ़ा देने के कारणों की जानकारी दी है. उनका सबसे बड़ा दर्द ये था कि वो देश के लिए पैसा बनाने वाले क्रिएटर्स (उद्योगपति) को दिन रात गलियां नहीं दे सकते। बता दें कि राहुल गाँधी लगातार देश के दो तीन उद्योगपतियों पर निशाना साधते रहते हैं और आरोप लगाते रहते हैं कि देश का प्रतिशत धन सिर्फ गिने चुने उद्योगपतियों के पास है जो प्रधानमंत्री मोदी के मित्र हैं. गौरव बल्लभ को शायद इन्ही वेल्थ क्रिएटर्स को भला-बुरा कहना पसंद नहीं आया. दूसरे उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर सनातन विरोधी होने का बड़ा आरोप भी लगाया और कहा कि वो सनातनविरोधी नारे नहीं लगा सकते।
वहीँ महाराष्ट्र के संजय निरुपम कांग्रेस पार्टी के खिलाफ लगातार मोर्चा खोले हुए थे, MVA में सीट शेयरिंग को लेकर वो कांग्रेस नेतृत्व पर उँगलियाँ उठा रहे थे। दरअसल वो मुंबई में सीट शेयरिंग को लेकर काफी नाराज़ थे क्योंकि इसके चलते उनका चुनाव लड़ने का सपना पूरा नहीं हो सकता और वो खुलकर बगावत पर उतर आये. यही वजह है कि संजय निरुपम को कांग्रेस पार्टी ने 6 वर्षों के लिए पार्टी से निष्काषित कर दिया। निष्काषन की खबर के बाद संजय निरुपम ने कहा कि उन्हें ये देखकर अच्छा लगा कि मेरे इस्तीफ़ा देने के बाद कांग्रेस पार्टी ने मुझे निष्काषित कर दिया।

