Punjab News: बंगाल टाइगर का बच्चा 95 लाख में, बाज की कीमत छह हजार, पशु तस्कर गिरोह का खुलासा

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Punjab News: वन विभाग की टीम ने जंगली जानवर तस्कर गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। दोनों टाइगर के बच्चे को 95 लाख रुपए में बेच रहे थे। ये गिरोह जंगली जानवरों की तस्करी कर उनको बेचने और खरीदने का व्यापार करते हैं। वन विभाग के अधिकारी जसवंत सिंह ने बताया कि पूछताछ के दौरान तस्ककर मनीष कुमार ने माना कि वह अब तक गिरोह के साथ मिलकर 6-6 हजार रुपए में पांच बाज और तीन कछुए बेच चुका है। तस्कर गिरोह मोर के बच्चे, तोते के अलावा अन्य पालतू जानवरों की तस्करी करता है। पूरा गिरोह ही जंगली जानवरों की तस्करी के व्यापार से जुड़ा हुआ है।

करतारपुर पुलिस और वन विभाग ने मिलकर पशु तस्करी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया। ये 95 लाख रुपए में बंगाल टाइगर के बच्चे को बेचने की डील कर रहे थे। गिरोह के तीन आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर दो हिरासत में लिए हैं। पूछताछ में आरोपियों ने अपना नाम मनीष निवासी गांव नगला और अनमोल निवासी तेज मोहन नगर जालंधर बताया है। मामले में नामजद तीसरा आरोपी न्यू देओल नगर निवासी दीपांशु फरार है।

व्हाट्सएप ग्रुप में डील

थाना करतारपुर प्रभारी रमनदीप सिंह ने बताया कि वन विभाग के वन रेंजर जसवंत सिंह ने शिकायत दर्ज करवाई कि उन्हें गुप्त सूचना मिली कि किशनगढ़ में द पेट क्लब के नाम से दुकान चलाने वाले मनीष जंगली जानवरों की तस्करी करता है। बताया कि जांच करवाई गई तो पता लगा कि पहले भी गिरोह के साथ मिलकर जंगली जानवर बेच चुका है। अब व्हाट्सएप ग्रुप में ग्राहकों को बंगाल टाइगर के बच्चे की वीडियो भेज कर 95 लाख रुपए में डील कर रहा है।

थाना प्रभारी ने बताया कि शिकायत मिलते पर वन विभाग के साथ मिलकर मामले की जांच कर आरोपी मनीष, अनमोल और दीपांशु के खिलाफ नेशनल वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 के तहत 10 धाराओं में केस दर्ज किया है। सूत्रों के मुताबिक किशनगढ़ में दुकान चलाने वाले मनीष और अनमोल को पकड़ लिया है। मामले में नामजद फरार दीपांशु की गिरफ्तार को छापेमारी जारी हैं।

पांच बाज और तीन कछुए की तस्करी

पूछताछ में पता चला कि गिरोह अभी तक पांच बाज और तीन कछुओं की तस्करी कर चुका है। 6 हजार रुपए में पांच बाज और तीन कछुआ बेच चुका है। गिरोह मोर के बच्चे, तोते और अन्य पालतू जानवरों की तस्करी करता है। वन विभाग अधिकारी ने बताया कि गिरोह बड़े स्तर पर मोबाइल की मदद से सोशल मीडिया पर ग्रुप बनाकर जानवरों की फोटो और वीडियो डालते हैं। इससे ग्राहक इनके संपर्क में आते हैं।

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