भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देश की एकता को लेकर कहा था कि एक देश-दो निशान, दो विधान, दो प्रधान.. नहीं चल सकता।
स्वर्गीय मुखर्जी का ये कथन प्रासंगिक होकर कोविड को लेकर सरकारों की दोहरी नीतियों पर भी सवाल उठा रहा है। जहां हर प्रदेश में कोरोना दस्तक दे रहा है वहीं महामारी कानून लागू करने में भी पूरे देश में एक नियम ही होना चाहिए है। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। डा.श्यामाप्रसाद मुखर्जी की विचारधारा पर चलने वाले भी एक महामारी कानून, एक कोरोना प्रोटोकाल को नहीं अपना रहे हैं। कई सूबों में विधासभा चुनावों के दौरान रैलियों में लाखों की भीड़ इकट्ठा है। लेकिन उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के दौरान योगी सरकार ने सख्त निर्देश जारी कर काबिलेतारीफ कदम उठाए हैं। अब देखना ये है कि इन निर्देशों का कितना पालन होता है।
उत्तर प्रदेश बड़ा सूबा है और यहां का पंचायत चुनाव धारा 144 के साये मे होगा। योगी सरकार का ये फैसला उन राज्यों को आइना दिखा रहा है जहां भाजपा के ही शीर्ष नेता कोरोना के खतरों में लाखों की भीड़ इकट्ठा करके जनता को खतरे में डाल रहे हैं।
कोविड के खतरों को बढ़ता देख योगी सरकान ने ना सिर्फ पूरे प्रदेश की जनता की जीवन रक्षा के लिए सख्ती से नियम लागू करने का आदेश दिया है बल्कि पंचायत चुनाव के प्रचार के लिए जनसभाओं और रैलियों में भीड़ ना लगाने के दृष्टिगत धारा 144 का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। कोरोना के बढ़ती रफ्तार के दृष्टिगत योगी सरकार ने नए नियम को सख्ती से पालन करने के.निर्देश दिए हैं –
शहरी इलाकों में कोरोना मरीज़ मिलने पर इलाक़ा कंटेनमेंट ज़ोन घोषित होगा।
एक मरीज मिलने पर 20 मकानों का इलाका सील होगा।
एक से अधिक केस मिलने पर 60 मकानों का इलाका सील कर दिया जाएगा ।
कंटेनमेंट जोन में लोगों का आवागमन बंद हो जाएगा
वहां के लोगों को 14 दिन तक इसी स्थिति में रहना पड़ेगा।
इलाके में सर्विलांस टीम सर्वे और जांच करेंगी। सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अफसरों को मुख्य सचिव आर के तिवारी ने आदेश जारी किये
बहुमंजिले अपार्टमेंट के लिए नियम कुछ अलग होंगे।
एक मरीज मिलने पर अपार्टमेंट की उस मंजिल को बंद कर दिया जाएगा।
एक से अधिक मरीज मिलने पर ग्रुप हाउसिंग का संबंधित ब्लॉक सील होगा। चौदह दिनों तक एक भी मरीज न मिलने पर ही कंटेनमेंट जोन समाप्त होगा।
इन फैसलों के साथ पंचायत चुनाव के दौरान धारा 144 पर पूरी तरह से अमल प्रशासन के लिए कड़ी चुनौती है।
इस चुनाव में यूपी खरा भी उतर गया तब तो भाजपा के शीर्ष नेताओं के तुलना में मुख्यमंत्री योगी का कद काफी बढ़ जाएगा। क्योंकि बड़े-बड़े भाजपा के लोकप्रिय नेताओं ने तमाम राज्यों में भीड़ इकट्ठा करके कोरोना के खतरों को बढ़ाया है।

