रंजीता सिन्हा
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चार मिनट की दूरी तय करने के लिए अगर साढ़े चार साल लगा दिये तो इसके अर्थ तो निकाले जाएंगे ही। मसला दो राजनीतिक हस्तियों की मुलाकात का हो तो निहितार्थ भी राजनीतिक ही निकलेंगे। सीएम योगी का आवास 5 कालीदास मार्ग और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या का आवास 7 कालीदास मार्ग। पैदल भी जाएं तो चार-पांच मिनट से ज्यादा नहीं लगेंगे, लेकिन इस दूरी को तय करने में योगी ने साढ़े चार साल लगाये और सीएम बनने के बाद पहली बार केशव प्रसाद के घर गये। आधिकारिक बयान आया कि, योगी केशव के नवविवाहित बेटे-बहू को आशीर्वाद देने गये थे। सच तो यह भी है शादी-ब्याह के मौके बिगड़े नाते-रिश्तों को सुलझाने-निपटाने का एक बड़ा अवसर होते हैं।
यूपी के सियासी गलियारों में बीते लंबे वक्त से सीएम योगी के इर्द-गिर्द सवालों, कयासों, नाराजागियों का सिलसिला है, इन्हीं शब्दों के साथ डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या का नाम भी आता है, जिन्होंने पिछले दिनों यूपी के भावी विधानसभा चुनाव को लेकर सीएम योगी का नाम जुबां से नहीं निकाला। मीडिया ने जब भी केशव मौर्या से सवाल किया कि, इस चुनाव में यूपी का चेहरा कौन होगा? तो वह बोले, यह तो केन्द्रीय नेतृत्व ही तय करेगा। जबकि दूसरी ओर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह इसी सवाल पर कभी योगी आदित्यनाथ का नाम लेने से पीछे नहीं हटे। अगर सीएम और डिप्टी सीएम के बीच कोई गलतफहमियां ही नहीं तो केशव को भी स्वतंत्रदेव की ही तरह योगी जी का नाम लेने में क्या तकलीफ हो सकती है?
एक तरफ बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष और प्रदेश प्रभारी राधामोहन सिंह लखनऊ पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर रहे हैं और आगामी चुनाव की रणनीति बनाई जा रही है। वहीं दूसरी तरफ चुनाव में मुख्यमंत्री के चेहरे पर बवाल मचा हुआ है। केशव प्रसाद मौर्य कह चुके हैं कि सीएम का फेस केंद्रीय नेतृत्व तय करेगा। गौर हो कि, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच मनमुटाव की खबरें कई बार आ चुकी हैं। यह पूरा मामला दिल्ली दरबार में भी पहुंचा है। संभव है दिल्ली दरबार ने ही आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर समझावन-बुझावन की रणनीति फिलहाल अपनायी हो। असल में, पंचायत चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद पार्टी हाईकमान यूपी चुनाव को लेकर सजग हो गया और नाराज नेताओं के साथ सरकार में शीर्ष पदों पर बैठे लोगों के मनमुटाव को दूर करने की कोशिश शुरू हुई। चर्चा तो योगीराज में ब्राहमणों को उपेक्षित करने को लेकर भी है।
हालांकि, राजनीतिक समीक्षकों की नजर में योगी का केशव के घर पहुंचना लंच-पॉलिटिक्स के सिवाय और कुछ नहीं था। बताया जा रहा है कि केशव मौर्य के घर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कृष्ण गोपाल पहले से मौजूद थे। भारतीय जनता पार्टी कोर कमेटी के सदस्यों का डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के घर पर लंच का कार्यक्रम था। इस लंच में आरएसएस के कृष्ण गोपाल भी मौजूद थे। इसी बीच सीएम योगी आदित्यनाथ भी अचानक केशव प्रसाद मौर्य के घर पर पहुंच गए हैं। साढ़े चार साल में मुख्यमंत्री योगी का केशव मौर्य के घर जाना बड़ी घटना है। मध्यस्थता कराने वाले पहले से वहां थे, सो सबकुछ सोचा-समझा और दिन के उजाले में हुआ ताकि मीडिया भी इसे वहीं समझे जो बताया जाय।
थोड़ा पीछे जाकर समझा जाय तो इसी कड़ी में पहले आरएसएस के दत्तात्रेय होसबाले और फिर बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने यूपी का दौरा किया। बीएल संतोष ने लखनऊ में तीन दिन तक बैठक की थी और केशव प्रसाद मौर्य समेत कई नेताओं से मुलाकात की थी। बीएल संतोष ने पूरी रिपोर्ट बनाकर दिल्ली हाईकमान को सौंप दी थी। इसके बाद दिल्ली हाईकमान से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुलाकात की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद लखनऊ आते ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने राजनीतिक नियुक्तियां शुरू कर दी थीं, जो कई महीने से नहीं हुई थीं। इसके साथ ही संगठन में भी खाली पदों को भरा जाना शुरू कर दिया गया।
इस बीच बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने बयान दे दिया कि 2022 का चुनाव बीजेपी योगी आदित्यनाथ के फेस पर लड़ेगी। इस बयान पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सीएम का फेस दिल्ली तय करेगा। दोनों के बयानों से लग रहा था कि सीएम योगी और केशव प्रसाद मौर्य के बीच बर्फ अभी पिघली नहीं है। पश्चिम बंगाल में मिली हार ने इस कदर सबक दिया हे कि, बीजेपी संगठन, सरकार और संघ यूपी में अपना हर कदम फूंक-फूंक कर रखना चाहती है। बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष एक बार फिर दो दिनों तक लखनऊ में डेरा डाले रखा और पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। इन सबके बीच सीएम योगी आदित्यनाथ के अचानक डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के घर पहुंचने को लेकर कई तरह की अटकलबाजी शुरू होना स्वाभाविक है।
राजनीति की समझ और अनुभव रखने वाले जानते हैं कि, यूपी को लेकर पार्टी नेतृत्व भले ही यह कह रहा हो कि वहां कोई कलह थी ही नहीं, मीडिया जनित भ्रम था, वह भी अब खत्म हो गया है लेकिन वहां अब भी योगी बनाम केशव मौर्य चल रहा था या है भी? याद हो, केशव मौर्य 2017 में मुख्यमंत्री पद की रेस में सबसे आगे थे, पार्टी ने उन्हें चुनाव के मौके पर प्रदेश अध्यक्ष बनाकर यह संकेत भी दिया था। चुनाव रिजल्ट के बाद ऐन मौके पर उन्हें डेप्युटी बनना पड़ गया। सूत्रों की माने, तो केशव मौर्य 2022 में यूपी का चुनाव असम मॉडल पर चाहते हैं कि चुनाव में किसी को सीएम का चेहरा घोषित न किया जाए, सीएम का फैसला विधानमंडल दल की बैठक में हो। बहरहाल, बर्फ कितनी पिघली यह तो चुनाव करीब आने के साथ-साथ पता लगता रहेगा।

