Tiger Census 2023: MP को मिला टाइगर स्टेट का दर्जा, कर्नाटक दूसरे और UK तीसरे स्थान पर

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Tiger Census 2023: केंद्र सरकार द्वारा बाघ गणना के राज्यवार आंकड़े जारी किए गए हैं। जिनमें मध्य प्रदेश में सबसे अधिक 785 बाघ हैं। मप्र बांघों की संख्या के मामले में देश में नंबर वन राज्य बना है। मध्य प्रदेश को लगातार दूसरी बार टाइगर स्टेट का दर्जा मिला है। दूसरे स्थान पर कर्नाटक है। जहां 563 बाघ हैं। तीसरे स्थान पर उत्तराखंड 560 बाघ और चौथे स्थान पर महाराष्ट्र है। जहां पर 444 बाघ मिले हैं। उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में वैश्विक बाघ दिवस का आयोजन किया गया। इस दौरान केंद्रीय वन राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने बाघ गणना की रिपोर्ट जारी की।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी सहित केंद्रीय पर्यटन राज्यमंत्री अजय भट्ट इस दौरान मौजूद रहे। केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने ट्वीट कर मध्य प्रदेश को बधाई दी है। उन्होंने लिखा है कि मध्य प्रदेश को बधाई! देश में नई बाघ गणना के आंकड़ों के मुताबिक 785 बाघों के साथ मप्र देश का सबसे अधिक बाघ वाला राज्य बना है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ये अत्यंत हर्ष की बात है कि हमारे प्रदेशवासियों के सहयोग और वन विभाग के प्रयासों से चार सालों में प्रदेश में जंगल के राजा बाघों की संख्या 526 से बढ़कर 785 हुई है। सीएम शिवराज सिंह चौहाने ने प्रदेश की जनता और वन एवं वन्यप्राणियों के संरक्षण में सहयोग के लिए धन्यवाद और बधाई दी है।

MP में चार साल में बढ़े 259 बाघ

एमपी में 2006 में बाघ संरक्षण को गति दी गई थी। इसके बाद से बाघों की संख्या बढ़ रही है। 2006 में 300 बाघों के साथ मप्र सबसे अधिक बाघों वाला राज्य था। इसके बाद 2010 में संख्या घटकर 257 हो गई। 2010 में मध्य प्रदेश का टाइगर स्टेट का दर्जा कर्नाटक ने ले लिया था। 2014 में मप्र में 308 बाघ थे और 2018 में 526 बाघ हो गए। 2018 में मप्र ने सिर्फ दो बाघ अधिक होने के कारण से कर्नाटक से एक बार फिर टाइगर स्टेट का दर्जा छीन लिया। इसके बाद मप्र ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। चार साल में मप्र में 259 बाघ बढ़े हैं। जबकि कर्नाटक में सिर्फ 39 बाघों की संख्या बढ़ी है।

6.1 प्रतिशत प्रति वर्ष की रफ्तार से बढ़ रहे बाघ

9 अप्रैल 2023 को प्रोजेक्ट टाइगर के 50 साल पूरे होने पर मैसूरु में पीएम नरेंद्र मोदी ने 3167 बाघ होने की घोषणा की थी। उस समय के आंकड़े कैमरा-ट्रैप्ड इलाकों से आए थे। वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया ने कैमरा-ट्रैप्ड के साथ-साथ नॉन-कैमरा-ट्रैप्ड इलाकों से आए आंकड़ों का विश्लेषण किया। इसके अनुसार अधिकतम 3925 बाघ हैं। इसी आधार पर औसत 3682 बाघ होने का दावा किया है। यह प्रति वर्ष 6.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है। शिवालिक की पहाड़ियों और गंगा के मैदानों में बाघों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।

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