लखनऊ। भारत के करीब 18 से 20 हजार छात्र यूक्रेन (Ukraine) में फंसे हुए। इसमें तो ज्यादातर मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। इनके अभिभावकों का कहना है कि यह बच्चे एक हफ्ते पहले ही वापस दे सकते थे लेकिन वहां की सरकार और मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने आने नहीं दिया। उनको यह लगातार धमकी मिलती रहेगी अगर वह चले गए तो क्लास मिस हो जाएगा। ऐसी स्थिति में उनका एग्जाम भी नहीं हो पाएगा और उनके पुराने साल भी बर्बाद हो जाएंगे।
लखनऊ के गोमती नगर में रहने वाले अशोक घोष की बेटी ऋषिका घोष भी उनमें से एक है। ऋषि का की मां रूपाली को बताती हैं कि उन लोगों ने बच्चों से 1 सप्ताह पहले ही वापस इंडिया आने को कहा था। लेकिन वहां के मेडिकल कॉलेज (Medical college) प्रशासन ने जाने से मना कर दिया। इसके पीछे की दलील दी गई थी कि ऐसा करने से उनकी क्लास मिस हो जाएगी और हंड्रेड परसेंट उपस्थिति न होने के कारण आप एग्जाम नहीं दे पाओगे। इससे आपके पुराने साल भी बर्बाद हो सकते हैं।

Read also: नई दिल्ली: यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों के परिजन दूतावास के बाहर मौजूद, अधिकारियों से मांगी मदद
सायरन बजते ही बेसमेंट में जाना पड़ता है
रूपाली घोष ने बताया कि वहां स्थिति बहुत ही खराब होते जा रही है। सायरन बजते ही बच्चों को बेसमेंट में जाने के लिए बोल दिया गया। स्थानीय सरकार उसको बंकर का नाम दे रही है। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी यूक्रेन (Ukraine) की जिस शहर में पढ़ाई करती हो वहां पर करीब ढाई हजार बच्चे फंसे हुए हैं। वह सभी इंडिया आना चाहते हैं लेकिन फ्लाइट का किराया भी 25000 की जगह पर ₹70000 हो गया है। वही यूक्रेन एयरलाइंस से जुड़ी जो फ्लाइट ए हैं वह तो 100000 से लेकर ₹500000 तक किराया मांग रही हैं। ऐसे में पर्याप्त पैसे की व्यवस्था न होने की वजह से कई लोग चाहकर भी नहीं आ पा रहे हैं।
Read also: यूक्रेन में फंसे लोगों की यात्रा का खर्च उठाएगी राज्य सरकार : स्टालिन

प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार से नहीं मिल रही कोई मदद
अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि इस पूरे प्रकरण में उत्तर प्रदेश सरकार (Government of Uttar Pradesh) या केंद्र सरकार की तरफ से कोई भी मदद नहीं मिल पा रही है। हेल्पलाइन नंबर पर फोन किया गया तो बस संपर्क में रहने को बोला जा रहा है। उन्होंने बताया कि वहां पर भारतीय दूतावास से भी बच्चों ने संपर्क किया है लेकिन वहां भी कोई खास मदद नहीं कर पा रहे हैं थोड़ी बहुत जानकारी देते रहते हैं। रूपाली घोष और अशोक घोष ने भारत सरकार से जल्द से जल्द सभी बच्चों को सुरक्षित देश वापस लाने की अपील की है।

