- दूसरी लहर में 70 प्रतिशत तक बढ़ गयी थी दवाइयों की सेल
- बीमारी के डर और आउट ऑफ स्टॉक होने की वजह से बढ़ा दवाइयों का कारोबार
अमित बिश्नोई
मेरठ। कोरोना की दूसरी लहर धीरे-धीरे दम तोड़ने लगी है लेकिन बीते डेढ़ महीने पीक पर रहने के दौरान प्रदेश वासी कोरोना वायरस की अरबों रुपए की दवाइयां खा चुके हैं। जी हां, चौंकिए मत। बाजार की स्थिति ख़ुद इसकी गवाही दे रही है। दवा कारोबारियों के अनुसार कोरोना के पीक पर रहते हुए कुछ ही दिनों में दवाइयों की सेल में 70 प्रतिशत तक का इज़ाफ़ा हुआ है।
घर-घर रही बीमारी
डेढ़ महीने कोरोना के पीक पर रहने के दौरान घर घर बीमारी ने धावा बोला था। परिवार का हर सदस्य इसकी चपेट में आया। शायद ही कोई घर ऐसा बचा हो जहाँ बीमारी न पसरी हो। ये हाल प्रदेश के लगभग सभी 75 जिलों का रहा है। आंकड़ों के अनुसार कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में संक्रमितों की संख्या में भी काफी ज्यादा इजाफा हुआ है. इससे बचाव के लिए लोगों ने दवाइयों का अंधाधुंध सेवन किया। यही वजह रही है कि कोरोना संक्रमण से बचाव में इस्तेमाल होने वाली दवाइयों की खरीद का आंकड़ा कुछ ही दिनों में इतना ज्यादा बढ़ गया है। दवा कारोबारियों की माने तो हर जिले में 50 लाख से 150 करोड़ रुपए की दवाइयों की बिक्री इस दौरान में हुई है। ऐसे में माना जा सकता है प्रदेश भर में ही अरबों रुपये की दवाइयों का सेवन इस अवधि में हुआ है।कोरोना की पहली और दूसरी लहर में हुई सेल में अंतर इसी बात से समझा जा सकता है कि पिछले वर्ष जहां सर्जिकल सामान की बिक्री 60 फीसदी तो दवाइयों की बिक्री 40 फीसदी हुई थी, वहीं इस बार दवाइयों का बाजार 70 फीसदी और सर्जिकल सामान की बिक्री 35 से 40 फीसदी तक हुई है।
जबरदस्त रही डिमांड
कोरोना की पहले और दूसरी लहर मिलाकर यूपी में लाखों केस कोरोना संक्रमितों के मिले हैं। इसके अलावा संपर्क में आये या अन्य लोगों ने भी इस बार धड़ल्ले से दवाइयों का प्रयोग किया है। घर में रहते हुए भी काफी लोगों ने पैरासिटामाॅल, आईवर मैक्कटिन, विटामिन सी- डी, जिंक, फेबीफ्लू का सेवन किया है। इसके अलावा लोगों ने आक्सीमीटर, थर्मामीटर भी खूब खरीदे। बाजार में इस बार सबसे ज्यादा डिमांड इनकी ही रही. जबकि कोरोना के पहली लहर में सिर्फ सेनिटाइजर, मास्क और ग्लव्ज की ही डिमांड रही। इस बार पल्स ऑक्सीमीटर, ऑक्सीजन फ्लोमीटर, डिजिटल थर्मामीटर, वेपोराइजर, नेबुलाइजर और मास्क की भी काफी ज्यादा डिमांड रही.मेरठ में एक दवा एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेश गुप्ता बताते हैं कि सब मिलाकर जिले में लगभग 150 करोड़ की सेल इस अवधि में हुई है। वहीं गोरखपुर के दवा कारोबारी योगेंद्र नाथ दुबे भी बताते हैं कि डेढ़ महीने में जिले में लगभग 120 करोड़ का व्यापार दवाइयों का हुआ है।
सताता रहा है डर
कोरोना की दूसरी लहर से बचाव के लिए इस बार घरों में भी दवा का स्टॉक जमकर हुआ है इससे पूर्व केवल बाजारों में ही दवाइयों का स्टॉक होता आया है, लेकिन इस बार दवा न मिलने के डर से लोगों ने घरों में दवाओं को जमकर स्टॉक किया। कोरोना संक्रमण के बढ़ते कहर और आउट ऑफ स्टॉक के चलते कई गुना महंगी मिल रही दवाइयों से घबराकर लोगों ने कोरोना के इलाज़ में उपयोग में आने वाली दवाओं को स्टॉक कर लिया। कोरोना काल में खांसी, बुखार के अलावा विटामिन, एंटीबॉयोटिक व स्टेरॉयड दवाओं की कंज्यूम सबसे अधिक हुई है. ।
इस दवाइयों ने गरमाया बाजार
- फेबिफ्लू
- पैरासीटॉमोल
- मल्टी विटामिन
- जिंकोविट टेबलेट विटामिन सी
- रेमडेसिविर
- टैसिलीजुमैब
- सेफ्ट्रैक्ससोन
- सेफ्ट्रैक्सोन सलबैक्टम
- सेफटाजिडिम
- मेरोपेरोनेम इंजेक्शन
- क्लोरोक्नि टेबलेट-इंजेक्शन
- मेडरोल
ये भी जानिए
पहली लहर में
- 60 से 70 प्रतिशत सर्जिकल आइटम्स की सेल हुई थी
- दवाओं की सेल मात्र 35 से 40 प्रतिशत बढ़ी थी
दूसरी लहर में
- 35 से 40 प्रतिशत थी सर्जिकल की सेल
- 65 से 70 प्रतिशत दवाओं की सेल में आया उछाल

