नई दिल्ली। एक साल के भीतर ही खाने-पीने की आम चीजों की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है। सरकार की लाख कोशिशों के बाद भी कीमतों पर कोई काबू नहीं है। यहां तक कि नमक की कीमत बढ़ गई है। उपभोक्ता मंत्रालय के आंकड़े की माने तो एक साल पहले चावल का भाव 34 रुपये किलो था जो अब 37 से 38 रुपये पर पहुंच गया है। वहीं गेहूं 25 रुपये से 30 रुपये प्रति किग्रा पर पहुंच गया है। जबकि आटा का भाव 29 रुपये से 35 रुपये किलो तक पहुंचा है। अरहर की दाल एक साल पहले 104 रुपये किलो पर थी जो अब 108 रुपये किलो बिक रही है। उड़द की दाल 104 से 107 रुपये किलो जबकि मसूर दाल 88 से 97 रुपये प्रति किलो और दूध 54 रुपये से बढ़कर 55-56 रुपये लीटर हो गया है। आरबीआई के मुताबिक अभी खुदरा महंगाई की दर 6 प्रतिशत से ऊपर ही रहेगी। उपभोक्ता मंत्रालय ने तेल के दाम कम करने के लिए कई बार तेल कंपनियों और संगठनों को बुलाया है। कंपनियों का कहना है कि लगातार वह तेल कीमतें को कम कर रही हैं। पर खुले बाजार में तेल की कीमतें 150 रुपये लीटर से ऊपर हैं।
आटा, सूजी और मैदा निर्यात के लिए गुणवत्ता प्रमाणपत्र जरूरी कर दिया गया है। गत 13 मई को गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगने के बाद भी आटा निर्यात बढ़ा है। एक्सपोर्ट इंस्पेक्शन काउंसिल से निर्यात के लिए मंजूरी लेनी होगी। इसके प्रमुख केंद्र मुंबई, चेन्नई, दिल्ली और कोलकाता में स्थित हैं। गत 13 मई को गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया था। उसके बाद से आटा, सूजी और मैदा निर्यात अचानक बढ़ गया था। ऐसी आशंका जताई थी कि घरेलू बाजार में आटा की उपलब्धता पर असर होगा। इससे कीमतें बढ़ सकती हैं। इस पर काबू पाने के लिए ही 12 जुलाई को विदेश व्यापार महानिदेशालय यानी डीजीएफटी ने आटा,सूजी और मैदा निर्यात पर पाबंदी लगाई थी। सरकार लगातार कमोडिटीज कीमतों को कम करने का प्रयास कर रही है। पिछले साल की तुलना में इस वर्ष कीमतें काफी ऊंची हैं। खुदरा महंगाई दर जहां जुलाई 2021 में 5ः59 प्रतिशत थी। वहीं यह जून 2022 में 7ः01 प्रतिशत पर पहुंच गई है।

