अपनों के आने की बाट जोह रहीं पोटलियों में बंधी अस्थियां

मेरठ रीजनअपनों के आने की बाट जोह रहीं पोटलियों में बंधी अस्थियां

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अपनों के आने की बाट जोह रहीं पोटलियों में बंधी अस्थियां

सूरजकुंड श्मशान घाट पर एक साल से पोटलियों में बंद हैं कोरोना संक्रमितों की अस्थियां

मेरठ। कोरोना संक्रमण से जान गंवाने वाले कुछ लोग ऐसे भी रहे जिन्हें संक्रमण का शिकार होने के बाद से तो अपनों को देखना मिला ही नहीं अब उनकी अस्थियां तक को अपनों का इंतजार है। इंतजार है किसी अपने के आने का जो पोटली में बंधी उनकी अस्थियों को गंगाजी में प्रवाहित कर उन्हें मोक्ष दिलायेगा। इंतजार हैै कि, जीते जी अपनों से दूर हो गये लेकिन मरने के बाद अस्थियों के रूप में ही सही अपनों के हाथों गंगाजी तक जाने की रस्म पूरी होगी और उनकी आत्मा को शांति मिलेगी। लेकिन अंतिम संस्कार के तीसरे दिन फूल चुगने के दिन से शुरू हुआ इंतजार एक-एक दिन करके एक साल से अधिक समय में तब्दील हो चुका हैै।

हिंदू धर्म में किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होने के बाद धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार शव का अंतिम संस्कार किया जाता है। तीसरे दिन फूल चुगने की रस्म होती है जिसमें शव की अस्थियों को इकट्ठा कर गंगाजी में प्रवाहित किया जाता है। मान्यता है कि मृत व्यक्ति के परिवारजनों द्वारा गंगाजी में अस्थियों को प्रवाहित किये जाने से दिवंगत आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है। मगर सूरजकुंड स्थित श्मशाान घाट पर पोटलियों में बंधी लगभग 50 अस्थियां आज भी अपनों की बाट जोह रही है। इनमें से 40 पोटलियां तो एक साल से मोक्ष प्राप्ति की राह देख रही अस्थियों की है। यह पोटलियां हैं कोरोना संक्रमण से जान गंवाने वालों की जिनके शव का अंतिम संस्कार करने के बाद उनकी अस्थियां चुगने तक कोई नहीं आया। जीते जी अपनों से दूर हो गये कोरोना संक्रमितों की अस्थियों को भी अपनों को सहारा नहीं मिला और उनके फूल चुगने तक कोई नहीं आया। सूरजकुंड श्मशान घाट प्रबंधन ने कोरोना संक्रमितों की अस्थियों को पोटलियों में बांधकर रखा हुआ है। इन पोटलियों पर दिवंगत व्यक्ति का नाम और मृत्यु की तारीख आदि जानकारी लिखी है। मोेक्ष प्राप्ति के लिये अपनों के आने का इंतजार कर रहीं अस्थियों के साथ श्मशान घाट प्रबंधन को भी इन अस्थियों को लेने के लिये आने वाले का इंतजार है।

कोरोना के खौफ से अस्थियां लेने नहीं आ रहे परिवारजन

एक साल पहले अपनों को कोरोना संक्रमण से जान गंवाते देखने वाले लोगों में कोरोना का खौफ अब तक तारी है। माना जा रहा है कि कोरोना संक्रमितों की अस्थियों को लेने के लिये लोग इसलिये नहीं आ रहे क्योंकि कोरोना का भयावह रूप देख चुके लोगों को अस्थियां उठाने पर संक्रमित होने का खतरा सता रहा है। सूरजकुंड श्मशान घाट से जुड़ी बुरी यादें भी उन्हें यहां आने नहीं दे रही हैं। ऐसे में यदि कोई सामाजिक संगठन दिवंगतों के परिवार से संपर्क कर उन तक अस्थियां पहुुंचाने या परिवार की अनुमति मिलने पर अस्थियों को गंगाजी में प्रवाहित करने की जिम्मेदारी उठाये तो निश्चित ही यह बेहद सराहनीय कार्य होगा। वहीं मान्यताओं के अनुसार दिवंगत आत्माओें को मोक्ष की प्राप्ति भी हो सकेगी।

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