Terroist Attack: आतंकी हमले में शहीद प्रवीण को छह साल के बेटे ने दी मुखाग्नि तो रो उठा गढ़वाल

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टिहरी गढ़वाल। कश्मीर के शोपियां में आतंकी हमले में टिहरी गढ़वाल के गांव पुंडोली निवासी सैनिक प्रवीण सिंह का शव आज शनिवार को दोपहर बाद पैतृक गांव पहुंचा। पार्थिव शरीर के पहुंचने पर गांव ही नहीं आसपास के इलाकों के लोगों का हुजूम एकत्र हो गया। वहीं परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। शहीद को श्रद्धांजलि देने हर कोई ललायित था। पूरा गांव प्रवीण सिंह अमर रहे,भारत माता की जय के नारों से गूंज रहा था। इस दौरान अपने बलिदानी पिता की तस्‍वीर हाथ में लिए छह साल के वंश को देखकर हर आंखों में आंसू भर आए। बलिदानी प्रवीण सिंह केा श्रद्धांजलि देने के बाद अंतिम यात्रा की तैयारी की गई। जिसमें बलिदानी की शहादत में नारे लगाए गए। बलिदानी सैनिक को पैतृक घाट पर अंतिम विदाई के बाद मुखाग्नि बेटे के हाथों दिलवाई गई। प्रवीण सिंह 2011 में गढ़वाल राइफल में भर्ती हुए थे। वेा इस समय 12 वीं राष्ट्रीय राइफल में तैनात थे। भिलंगना ब्लाक के गांव पुंडोली निवासी सैनिक प्रवीण गत गुरुवार को सेना के एक सर्च आपरेशन में शामिल थे। इस दौरान आतंकियों के आइईडी ब्‍लास्‍ट में वह घायल हो गये। उन्हें अस्पताल भर्ती कराया गया जहां पर उपचार दौरान उनकी मौत हो गयी थी।

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सेना के अधिकारियों ने प्रवीण के पिता सेवानिवृत्त सैनिक प्रताप सिंह को यह जानकारी दी। घर में बेटे की शहादत की जानकारी के बाद कोहराम मच गया। बेटे की मृत्यु की खबर सुनकर मां बेसुध है और पिता का भी रो रोकर बुरा हाल है। प्रवीण सिंह की पत्नी अमिता और छह वर्ष का बेटा वंश देहरादून में रहते हैं। शहीद के पिता प्रताप सिंह और मां दीपा गांव में रहते हैं। शहीद जवान प्रवीण का बड़ा भाई प्रदीप जर्मनी में नौकरी करते हैं। शहीद की शहादत में पूरा गांव प्रवीण सिंह अमर रहे के नारे लगा रहा था। शहीद प्रवीण का पार्थिव शरीर आज दोपहर बाद गांव पहुंचा तो भारत माता की जय के नारे गूंजने लगे। बताया जाता है कि विगत 15 मई को शहीद प्रवीण छुट्टी लेकर गांव आए थे और 23 मई को वापस गए थे। इस दौरान वह देवता की पूजा में शामिल हुए थे। शहीद ने फिर से जल्द ही गांव आने का वादा किया था। लेकिन शायद वो नहीं जानते थे कि अबकी बार वो खुद नहीं उनका पार्थिव शरीर गांव में आएगा। ग्रामीणों के अनुसार शहीद प्रवीण काफी हंसमुख और मिलनसार थे। शहीद जवान प्रवीण सिंह को श्रद्धांजलि देने के लिए और उनके शोक में आज शनिवार को पूरा घनसाली बाजार बंद रहा।

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