तमिलनाडू विधानसभा चुनाव में महिला वोटर निभाएंगी महत्वपूर्ण भूमिका
पीएम मोदी ने कांग्रेस और द्रमुक का बताया महिला विरोधी, जयललिता को किया याद
सुनील शर्मा
न्यूज डेस्क। तमिलनाडू में आज एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, कांग्रेस और द्रमुक ने मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी की सम्मानित माताजी का अपमान किया है। भगवान न करे, लेकिन वे सत्ता में आए तो राज्य की कई और महिलाओं का अपमान करेंगे। पीएम मोदी ने जनता को 25 मार्च 1989 के दिन का जिक्र हुए कहा, तमिलनाडु की विधानसभा में डीएमके नेताओं ने अम्मा जयललिता जी के साथ किस तरह का व्यवहार किया था यह कभी नहीं भूलना। डीएमके और कांग्रेस महिलाओं की सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकतीं। तमिलनाडु की जनता सब देख रही है, वह कभी भी राज्य की महिलाओं का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगी।
पीएम मोदी का विपक्षी पार्टियों पर महिलाओं का अपमान करने का आरोप, जयललिता के साथ हुए दुव्र्यवहार का जिक्र करते हुए यह कहना कि महिलाओं का अपमान करना कांग्रेस और डीएमके की संस्कृति है, सिर्फ चुनावी भाषण नहीं जिसमें उन्होंने विपक्षियों पर निशाना साधा है। बल्कि महिलाओं के अपमान का मुद्दा उठाकर पीएम मोदी ने राज्य की आधी से अधिक आबादी यानि महिला मतदाताओं की भावनाओं को हवा देकर उनके वोट अपने पाले में खिंचने का प्रयास किया है।
दरअसल तमिलनाडू की पांच दशकों की राजनीति में डीएमके (द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम) और एआईडीएमके (ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम) की महत्वपूर्ण भूमिका रही हैै। 2016 विधानसभा चुनाव के छह महीने बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री और एआईडीएमके प्रमुख जे जयललिता की मौत और 2018 में पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख करुणानिधि की मौत हो जाने के बाद यहां पहली बार हो रहे विधानसभा चुनाव में भाजपा ने एआईडीएमके के साथ गठबंधन किया है। वहीं इस चुनाव में कांग्रेस ने डीएमके से हाथ मिलाया है। राज्य की कुल 234 विधानसभा सीटों पर हो रहे चुनाव में सत्ता सिंहासन पानेे के लिये जीत का जादुई आंकड़ा 118 सीटों का है।
इस बार तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में 6.26 करोड़ मतदाता प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे। यहां खास बात यह कि राज्य में 3,08,38,473 पुरुष मतदाताओं के मुकाबले महिला मतदाताओं की संख्या 3,18,28,727 है। यानि महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष मतदाताओं सेे भी अधिक है। जाहिर है कि तमिलनाडू विधानसभा चुनाव में जीत का जादूई आंकड़ा हासिल करने के लिये महिला मतदाताओं का पक्ष में होना जरूरी है।
और बात सिर्फ आधी आबादी की संख्या तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ सालों से देश में महिला मतदाताओं की संख्या बढ़ने के साथ उनका वोटिंग प्रतिशत भी बढ़ता जा रहा है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 2019 के लोकसभा चुनाव में 67.2 फीसदी पुरुष मतदाताओं के मुकाबले 67 फीसदी महिला मतदाताओं ने वोट डाला था, यानी वोटिंग प्रतिशत लगभग बराबर था। बात करें तमिलनाडू में 2016 में हुए विधानसभा चुनाव की तो उस समय महिला-पुरुष मतदाताओं की संख्या लगभग बराबर थी। तब महिला मतदाताओं ने आगे बढ़कर मतदान किया और जयललिता मुख्यमंत्री पद पर काबिज होने में कामयाब रहीं।
यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने भाषण में बार-बार डीएमके और कांग्रेस गठबंधन पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया। वहीं जयललिता का जिक्र कर के पीएम मोदी ने जो मास्टर स्ट्रोक खेला है उसका चुनावी लाभ उन्हें कितना मिलेगा यह तो आने वाला वक्त ही बतायेगा। लेकिन यह तय है कि तमिलनाडू की राजनीति में महिला मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रही हैं। यही कारण है कि सभी राजनीतिक दलों की निगाहें महिला मतदाताओं पर टिकी हैं और येन-केन-प्रकारेण वह आधी आबादी का वोट अपने पाले में खींचने का हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। और पीएम मोदी का बयान भी तमिलनाडू विधानसभा चुनाव में महिला मतदाताओं के महत्व को जाहिर कर रहा है।

