पिथौरागढ़। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग आखिरकार 48 घंटे बाद वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया। राजमार्ग खोले जाने के बाद से वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है। भारतोली और स्वांला और आठवें मील के मलबे को भारी मशक्कत के बाद हटाया जा सका है। दिन में राजमार्ग बंद होने के कारण रोडवेज के लोहाघाट डिपो ने खेतीखान-देवीधुरा के वैकल्पिक मार्ग से पांच बसों का संचालन शुरू किया। जिससे कि आसपास के लोगों को किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना पडे़। भारतोली, आठवें मील पर मलबा आने और स्वांला में 30 मीटर तक सड़क बहने से राजमार्ग पर शुक्रवार रात करीब नौ बजे से आवाजाही बंद कर दी गई थी। डीएम नरेंद्र सिंह भंडारी ने मौका मुआयने कर काम में तेजी लाने के निर्देश दिए थे।
शनिवार रात से हाईवे को खोलने की मशक्कत कर रहे एनडीआरएफ के जवानों ने सबसे पहले भारतोली का मलबा हटाया। जिससे चंपावत से पिथौरागढ़ के लिए आवाजाही शुरू हो सकी। 20 घंटे से अधिक समय तक पहाड़ी वाले हिस्से की कटिंग कर स्वांला से दोपहर 1ः15 बजे वाहनों की आवाजाही शुरू की गई। इसके बाद 3ः05 बजे ही स्वांला में फिर मलबा आया। जिसे हटाने में कई घंटे लग गए। एनएच खंड के ईई सुनील कुमार ने बताया कि आखिर में आठवें मील पर आए मलबे को हटाकर सड़क को पूरी तरह से खोल दिया गया। वहीं सड़क बंद रहने से टनकपुर और चंपावत से आने वाले वाहनों पर रोक लगी थी।
मलबा आने से निर्माणाधीन टनकपुर-जौलजीबी सड़क बंद हो गई। पोकलैंड और डोजर लगाकर सीम के पास मलबे को हटाया गया। लेकिन इस मार्ग पर दो अन्य जगहों पर मलबा आने से आवाजाही सुचारु नहीं हो सकी है। दो दिन तक सड़क बंद होने से चंपावत और लोहाघाट के कारोबार पर इसका असर पड़ा। टैक्सी संचालन, होटल से लेकर सभी तरह की व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह से ठप रहीं। चंपावत व्यापार मंडल अध्यक्ष विजय चौधरी का कहना है कि चंपावत में एक करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है।

