संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भले ही कहा हो कि आरएसएस ज्ञानवापी मस्जिद विवाद पर आंदोलन नहीं करेगी मगर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के तेवर कुछ और हैं, मस्जिद परिसर में मिले शिवलिंग जिसे मुस्लिम पक्ष फव्वारा बता रहा है की पूजा अर्चना की अनुमति न मिलने पर वह आश्रम में धरने पर बैठ गए हैं. शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य अविमुक्तेश्वरानंद के ज्ञानवापी मस्जिद में पूजा अर्चना के एलान के बाद पुलिस प्रशासन ने उन्हें आश्रम में ही नज़र बंद कर दिया है.
दरअसल स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कल यानि 3 जून को घोषणा की थी वह अपने अनुयायियों के साथ 4 जून को ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में मिले शिवलिंग की पूजा अर्चना करेंगे। उनके इस एलान के बाद ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को और चौकस कर दिया गया है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा था कि उनके साथ 70 और लोग भी ज्ञानवापी मस्जिद में जाकर पूजा करेंगे. लेकिन पुलिस ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी और उन्हें अविमुक्तेश्वरानंद आश्रम में नज़रबंद कर पुलिस की मौजूदगी बढ़ा दी.
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बता दें कि ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का मामला वाराणसी की जिला कोर्ट में चल रहा है, जहाँ अगली सुनवाई 4 जुलाई को होगी। अदालत में मुस्लिम पक्ष ने अपनी दलीलें रख दी हैं और अब हिन्दू पक्ष अपने तर्कों और सबूतों को रखेगा। वहीँ ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में मिले शिवलिंग की पूजा के लिए दी गयी याचिका की सुनवाई फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट को सौंपी गयी है जो उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है.
उधर मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह का विवाद भी गहराया हुआ है, ऐसे में संघ प्रमुख ने दो दिन पहले अपने एक बयान में सवाल किया था कि सारी मस्जिदों में शिवलिंग की खोज क्यों? हालाँकि उन्होंने यह नहीं कहा था कि ज्ञानवापी या मथुरा का मामला विवादित नहीं है. उन्होंने कहा था कि जहाँ आस्था है उसको छोड़कर सारी मस्जिदों में खोजबीन न हो, साथ ही उन्होंने कहा था कि इस तरह के मुद्दे आपस में हल करने चाहिए नहीं अदालत जो भी फैसला दे उसका सम्मान करना चाहिए।

