नोएडा। पिछले कुछ सालों से कई रिटेल सेक्टर की कंपनियों के दिवालिया होने की खबर आई है। नवीनतम खबर सुपरटेक लिमिटेड (Supertech) की है जो 25 मार्च को इनसॉल्वेंसी में चली गई है। इनसॉल्वेंसी में कंपनी के जाने का अर्थ ये है कि कंपनी के दिवालिया होने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जिससे दिल्ली एनसीआर के रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक के हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में घर बुक कराने वाले होमबायर्स की मुसीबत बढ़ गई है। सुपरटेक के इनसॉल्वेंसी में जाने का 25 हज़ार होमबायर्स दिक्कतें बढ़ सकती हैं। इन होमबायर्स ने सुपरटेक के हाउसिंग प्रोजेक्ट में घरों की बुकिंग कराई थी लेकिन उन्हें अभी तक पजेशन नहीं मिला है। ये होमबायर्स पिछले कई साल से अपने घर के पजेशन मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद में सुपरटेक की कई परियोजनाएं अटकी हुई हैं। इन कंपनियों में निवेश करने वाले बायर्स ने अपना आशियाना बनाने के लिए अपनी जिंदगी की गाढी पूंजी लगाई है उन्हें यह समझ में नहीं आ रहा है कि कंपनी को दिवालिया घोषित करने के बाद क्या करें और कैसे अपनी जमा पूंजी को सुरक्षित करें अगर कोई बिल्डर दिवालिया हो जाता है तो उससे जुड़े हुए वायर्स के पास क्या विकल्प है आइए जानते हैं?
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प्रॉपर्टी के जानकार बताते हैं कि दिवालियापन कानून के अनेक पहलू हैं, जिनमें आम लोगों के हित और अधिकार का ख्याल रखा गया है। यूं तो यह कानून लेनदार और देनदार के बीच की समस्याओं को हल करने का एक प्रयास है, लेकिन यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि इस कानून से छोटे निवेशक छोटे सप्लायर, छोटे जमाकर्ता एवं इस तरह के अन्य लोगों के अधिकारों को सुरक्षा मिलेगी, जो किसी भी बड़ी कंपनी के कार्य से प्रभावित होता है।
कंपनी के दिवालिया होने पर या प्रोजेक्ट पूरा न होने पर रकम वापसी की मांग की जा सकती है जैसे सुपरटेक के करीब 25 हजार घर खरीदार अपने घर का कब्जा मिलने का इंतजार कर रहे हैं। ग्राहक अपना क्लेम लेने के लिए दावा फॉर्म भर सकते हैं। इसके लिए जितनी राशि बिल्डर को दी गई है वह डिटेल भरें। कंपनी अगर दिवालिया हुई और प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ तो रकम वापसी की मांग की जा सकती है। हालांकि, यह कंपनी की रीस्ट्रक्चरिंग पूरी होने तक संभव नहीं है। पैसों की रिकवरी की प्रक्रिया रिवाइवल प्लान फेल होने पर ही हो सकती है। खरीदार अथॉरिटी पर रिकवरी के लिए दबाव बना सकते हैं या ग्राहक घर बनवाने की मांग भी रख सकते हैं। घर खरीदारों को इंसाफ मिले, यह संबंधित अथॉरिटी की जिम्मेदारी है।
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कई सालों से लगभग 1500 ग्राहकों की तरफ से सुपरटेक के खिलाफ केस लड़ रहे हैं। पीयूष सिंह कहते हैं कि इस मामले में ग्राहकों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है। आईआरपी की तरफ से क्लेम मांगे जाएंगे, जिसे आपको 12 दिनों के अंदर सबमिट करना होगा। यह सुनिश्चित करेगा कि वह सभी लोग क्रेडिटर्स की कमेटी में शामिल किए जाएं और जब सुपरटेक के प्रोजेक्ट्स पर कोई फैसला किया जाएगा, तो उन्हें वोटिंग का अधिकार भी होगा।किसी कंपनी के दिवालिया होने का मतलब उसकी बर्बादी नहीं है। दिवालिएपन के लिए आवेदन करते ही सरकार उस कंपनी में एक अधिकारी बिठा देती है जो उसके कामकाज की निगरानी करता है और उसे समय से पूरा कराने की कोशिश करता है। सुपरटेक के मामले में एनसीएलटी ने हितेश गोयल को दिवाला समाधान पेशेवर नियुक्त किया है। मैजिकब्रिक्स डॉट कॉम की हेड (कंटेंट और रिसर्च) जयश्री कुरुप के अनुसार, ‘कंपनी को दिवालिया घोषित करना ग्राहकों के लिहाज से अच्छा है। यह सुनिश्चित करता है कि जिन ग्राहकों ने उस कंपनी में पैसे लगाए हैं, उन्हें वह वैल्यू मिलनी चाहिए।’

