लखनऊ। उप्र की बदहाल चिकित्सा सुविधा को पटरी पर लाने की कोशिश में जुटे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मुहिम कहां तक सफल होगी यह तो बाद में पता चलेगा। लेकिन इतना तय है कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 100 बेड का अस्पताल बन जाने से गरीब जनता को कुछ तो राहत मिलेगी। आज प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था सबसे बदहाल है। निजी चिकित्सा व्यवस्था महंगाई के कारण गरीबों की पहुंच से बाहर है।
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यहीं कारण है कि कोरोना संक्रमण के दौरान पहली और दूसरी लहर को काबू में करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को खुद मैदान में उतरना पड़ा था। सरकारी अस्पतालों में सरकार की ओर से दी जा रही भरसक सुविधाओं के बाद भी अस्पताल में कोविड मरीजों को ठीक से इलाज नहीं मिल पा रहा है।
पहले कार्यकाल में मिले अनुभव का लाभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अब अपने दूसरे कार्यकाल में उठाने की तैयारी में हैं। इसी के तहत सरकार ने ‘एक जिला, एक मेडिकल कालेज’ लक्ष्य रखा। इसमें सरकार का दावा है कि 61 मेडिकल कालेज बनकर तैयार हो चुके हैं जबकि बाकी 14 पर काम चल रहा है।
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इसके अलावा अब हर विधानसभा क्षेत्र में 100 बिस्तर वाला अस्पताल की तैयारी शुरू हो गई है। यह आने वाले पांच सालों में पूरी की जाएगी। गरीबों को चिकित्सा सुविधा के लिहाज से नि:शुल्क डायलिसिस सुविधा भी इन अस्पतालों में उपलब्ध कराई जाएगी।

