कोलकाता। पूर्व कप्तान और बीसीसीआई के अध्यक्ष सौरव गांगुली ने कहा है कि मौजूदा दौर में भारतीय तेज गेंदबाजी कमाल की है. गांगुली ने कहा कि कल्चरल चेंज और बेहतरीन फिटनेस ने इंडियन पेस अटैक को पूरी तरह बदल दिया. युवा जसप्रीत बुमराह और अनुभवी इशांत शर्मा, मो. शमी, उमेश यादव और भुवनेश्वर कुमार की मौजूदगी में इंडियन पेस अटैक दुनिया में सबसे मजबूत आक्रमण के रूप में उभरा है.
इसलिए इंडियन पेस मजबूत
गांगुली से भारतीय टेस्ट सलामी बल्लेबाज मयंक अग्रवाल केसाथ बीसीसीआई ट्विटर हैंडल पर चैट शो में पूछा गया कि बदलाव लाने में अहम भूमिका किसने निभाई, उन्होंने कहा कि मैं इसमें इन सभी का योगदान मानता हूं. कोच, फिटनेस, ट्रेनर और मुझे लगता है कि सांस्कृतिक बदलाव भी. उन्होंने कहा कि भारत में अब यह धारणा बन गई है कि हम अच्छे तेज गेंदबाज तैयार कर सकते हैं. केवल तेज गेंदबाज ही नहीं बल्कि बल्लेबाज भी फिटनेस के प्रति अवेयर हुए हैैं. उनके फिटनेस स्टैैंडर्ड बदले हैैं. मुझे लगता है कि इसमें बदलाव आया है.
बॉलर्स में आया विश्वास
जवागल श्रीनाथ, जहीर खान और आशीष नेहरा जैसे अच्छे तेज गेंदबाजों की अगुवाई करने वाले गांगुली ने कहा कि वर्तमान गेंदबाजों में यह विश्वास आ गया है कि वे रफ्तार के सौदागर बन सकते हैं. उन्होंने बीसीसीआई की सीरीज ‘दादा ओपन्स विद मयंक में कहा, ‘और इससे सभी की समझ में यह बात आ गयी कि अगर वे फिट हैं, अगर वे दमदार हैं तो फिर हम भी दूसरों की तरह तेज गेंदबाजी कर सकते हैं.
पहले मजबूत नहीं थे, हमने मेहनत की
- हाल में वेस्टइंडीज के पूर्व तेज गेंदबाजी इयान बिशप भी इंडियन पेस अटैक की तारीफ कर चुके हैैं.
- उन्होंने कहा था कि जिस तरह से 1970 और 1980 के दशक में उनकी टीम ने तेज गेंदबाजी को आगे बढ़ाया वही काम अब भारत कर रहा है.
- गांगुली ने कहा, ‘मेरी पीढ़ी के या उससे पहले के वेस्टइंडीज के खिलाड़ी नैसर्गिक तौर पर मजबूत और दमदार थे.
- हम भारतीय कभी नैसर्गिक रूप से इतने मजबूत और दमदार नहीं रहे, इसलिए हमने मजबूत बनने के लिये कड़ी मेहनत की.
- गांगुली ने आगे कहा कि मुझे लगता है कि यह संस्कृति में बदलाव है जो कि बेहद महत्वपूर्ण है.

