कुछ करना होगा

आर्टिकल/इंटरव्यूकुछ करना होगा

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अमित बिश्नोई
हैदराबाद में टीम इंडिया का बेडा किसने गर्क किया, ये एक बड़ा सवाल है। इंग्लैंड टेस्ट मैच जीत गया, इसमें कोई हैरानी वाली बात नहीं, अच्छी टीम है, अच्छी पहचान है, अच्छा अपोर्च है, युवा जोश और नेतृत्व है. हैरानी तो रोहित सेना की हार पर है और हार पर हैरानी सिर्फ इसलिए है कि मैच तो आपकी मुठ्ठी में था, मुट्ठी में ही नहीं पूरी तरह से जकड़ में था. बात सिर्फ इसकी हो रही थी कि टीम इंडिया ये मैच पारी के अंतर से जीतेगी या फिर उसे दोबारा बल्लेबाज़ी करनी पड़ेगी, बात सिर्फ इसकी हो रही थी कि टीम इंडिया मैच तीसरे दिन ही जीतेगी या फिर मैच को इंग्लैंड के बल्लेबाज़ चौथे दिन तक खींचेंगे। मैच चौथे दिन तक तो गया मगर नतीजा उल्टा आया, सबको हैरान करने वाला। टीम इंडिया की जीत देखने रविवार को लोग बड़ी संख्या में स्टेडियम में मौजूद थे, थोड़े बहुत इंग्लैंड के समर्थक भी थे मगर चेहरों के हाव भाव दोनों के अलग थे. भारतीय फैंस हैरत भरी नज़रों से मैदान पर होने वाली घटनाओं को देख रहे थे, उनके चेहरे पर हंसी भी थी मगर खिसियाहट भरी, क्या सोचकर स्टेडियम आये थे और भारतीय बल्लेबाज़ों ने उनकी संडे की छुट्टी किस तरह ख़राब की.

हैरत तो शर्मा जी को भी थी, मैच के बाद कह रहे थे कि समझ में नहीं आता कि गलती कहाँ पर हुई, कुछ करना होगा। क्या करना होगा और किसके खिलाफ करना होगा ये तो आने वाले मैचों में ही पता चलेगा। फिलहाल करने पर आया जाय तो रोहित के पास बहुत कुछ करने को है। क्या गिल के खिलाफ कुछ किया जा सकता है, क्या श्रेयस अय्यर के खिलाफ कुछ किया जा सकता है, सबसे बड़ी बात क्या रोहित के खिलाफ कुछ किया जा सकता है और इससे भी बढ़कर क्या कोच राहुल द्रविड़ के खिलाफ कुछ किया जा सकता है. करने को तो बहुत कुछ है लेकिन उसके लिए जिगर भी चाहिए।

एक ऐसी विकेट पर जहाँ इंग्लैंड का टॉम हार्टले जैसा एक डेब्यूटांट गेंदबाज़ तबाही मचा देता है, जहाँ जो रुट जैसा पार्ट टाइम गेंदबाज़ टीम का मुख्य गेंदबाज़ बन जाता है और विकेट पर विकेट निकाल कर देता है, जिनकी स्पिन गेंदबाज़ी से वो भारतीय बल्लेबाज़ डांस करने लगते हैं जिनकी तरबियत ही ऐसी पिचों पर होती है,जिनका टीम इंडिया में प्रवेश ही ऐसी पिचों पर खेलकर होता है. वो बल्लेबाज़ जो रुट के आगे नाकाम हो जांय तो हैरानी तो सभी को होगी, गुस्सा भी सभी को आएगा। एक ऐसी पिच जो स्पिनर्स के लिए मददगार थी, पहली पारी में भारतीय स्पिनर्स ने इसका सबूत भी दिया लेकिन एक अकेले ओली पॉप के आगे स्पिन तिकड़ी कैसे नाकाम हो गयी, जो कहीं न कहीं बड़ा सवाल भी खड़ा करती है. इंग्लैंड ने पिच को सही पढ़ा और मैच में चार स्पिनर्स के साथ जाना सही समझा. इंग्लैंड के गेंदबाज़ों ने जो 190 ओवर फेंके उसमें से स्पिनर्स ने 165 ओवर डाले। इंग्लैंड को उसका फल मिला।

टीम इंडिया सिर्फ तीन स्पिनर्स के साथ गयी. दूसरी पारी में तिकड़ी नाकाम हुई और मुट्ठी में जकड़ा हुआ मैच हाथ से चला गया. इंग्लैंड ने पिछले दौरे में भी जीत से शुरुआत की थी और बाद में श्रंखला हार गए थे मगर वो जीत इस तरह की नहीं थी, ये जीत इंग्लैंड ने इंडिया से छीनी है और तकलीफ की बात यही है. हैदराबाद में जो हुआ वो कहीं न कहीं लापरवाई से हुआ, अतिआत्मविश्वास से हुआ, तीन चार विकेट गिरने के बाद भी सभी को यही लग रहा था कि मैच तो इंडिया निकाल ही लेगी लेकिन मिडिल आर्डर और लोवर आर्डर के बल्लेबाज़ों के अगर शॉट सिलेक्शन को देंखे तो ओवर कॉन्फिडेन्स साफ़ झलकता नज़र आया है।

दूसरी तरफ इंग्लैंड के लोवर आर्डर को देखिये, वो चाहे रेहान अहमद हों या टॉम हार्टले। अगर इन बल्लेबाज़ों ने ओली पॉप का साथ न दिया होता तो क्या इंग्लैंड 420 के स्कोर तक पहुँच सकता था. टीम मैनेजमेंट को इस लापरवाही पर सख्ती तो दिखानी ही पड़ेगी, एक्शन तो लेना ही पड़ेगा। बताना होगा, समझाना होगा कि गेंदबाज़ों का काम सिर्फ गेंदबाज़ी ही नहीं है, उन्हें ज़रूरत पड़ने पर बल्लेबाज़ी भी करनी चाहिए। वो ज़माने चले गए जब सात नंबर के बाद बल्लेबाज़ी को ख़त्म माना जाता था, अब नए ज़माने की क्रिकेट है, भले ही आप विशेषज्ञ गेंदबाज़ हों मगर बल्लेबाज़ी भी इस खेल की बहुत बड़ी ज़रुरत है. रोहित ने कुछ करना होगा की जो बात कही उसे वाकई में करना होगा, कोई ये न समझे कि उसे टीम से कोई हिला नहीं सकता।

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