नागरिकता संशोधन कानून लाने की दलीलों को रखते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कल कहा कि विपक्ष इसे लेकर लोगों को गुमराह कर रहा है. शाह ने कहा कि ये कानून नागरिकता देने का है लेने का नहीं, उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चैलेन्ज करते हुए कहा कि वो बताये कि नागरिकता कानून के किस खंड में नागरिकता जाने की बात कही गयी है, हालाँकि विपक्ष के किसी भी नेता ने नागरिकता जाने की बात नहीं कही है वो भाजपा की मंशा पर सवाल उठा रही है कि नागरिकता संशोधन कानून की आड़ में समाज में वैमनस्यता फैला कर चुनावी लाभ लेना चाहती है. अमित शाह ने कल एक कार्यक्रम में कहा था कि नागरिकता पाने वाला चुनाव लड़ने का भी अधिकारी होगा जिसपर आम आदमी पार्टी संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने पलटवार करते हुए कहा कि इसका मतलब अब हम पाकिस्तानी घुसपैठियों को सरकार में हिस्से दारी देंगे।
केजरीवाल ने कह कि केंद्र सरकार अपने देश के बच्चों को रोज़गार देने में असमर्थ है, हज़ारों की संख्या में युवकों को इजराइल के वार जोन में मज़दूरी और नौकरी के लिए भेजा जा रहा. ऐसे में सरकार दावा कर रही है कि वो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान से आये लोगों के बच्चों को नौकरी देगी? केजरीवाल ने कहा कि एक माइग्रेशन आज़ादी के समय हुआ था और अब CAA के ज़रिये माइग्रेशन होगा। कहाँ बसायेंगे वहां से आने वालों को. इन देशों में लगभग तीन करोड़ अल्पसंख्यक रहते हैं. ये तीनों गरीब देश हैं, ऐसे में भारत की नागरिकता मिलना उनके लिए किसी सपने के पूरा होने से कम नहीं है.
केजरीवाल ने कहा कि सरकार कह रही है कि 2014 से पहले जो आया उसे नागरिकता दी जाएँगी लेकिन क्या 2014 के बाद से लोगों का आना बंद हो गया है. बता दें कि कल अमित शाह ने CAA को लेकर केजरीवाल पर कई हमले किये थे और कहा था कि उन्हें बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्यों से बड़ा लगाव है। अमित शाह ने कहा कि केजरीवाल पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि वो विभाजन की पृष्ठभूमि भूल गए हैं. अमित शाह के आरोप के जवाब में केजरीवाल ने पलटवार करते हुए कहा कि देश में रोहिंय्या 2014 के बाद आए, यानि भाजपा के शासनकाल में. केजरीवाल ने कहा कि भाजपा सरकार ने देश में न जाने कहां-कहां रोहिंग्या को बसा रखा है और अब ये पाकिस्तान से आए घुसपैठियों को भारत में नौकरियां देंगे।

