depo 25 bonus 25 to 5x Daftar SBOBET

स्मृति जी, शर्मा जी को हलके में मत लेना

आर्टिकल/इंटरव्यूस्मृति जी, शर्मा जी को हलके में मत लेना

Date:

अमित बिश्नोई
अमेठी और रायबरेली लोकसभा सीट पर कांग्रेस पार्टी किसे उम्मीदवार घोषित करेगी, इस सस्पेंस से जब आज सुबह पर्दा उठा तो लोगों को हैरानी हुई, राहुल गाँधी अमेठी की जगह रायबरेली से चुनाव लड़ रहे हैं वहीँ अमेठी से किशोरी लाल शर्मा का नाम था. ये नाम ऐसा है जिसे रायबरेली और अमेठी के लोग तो बहुत अच्छी तरह से जानते हैं लेकिन देश के बाकी हिस्से के लोगों ने शायद ये नाम पहली बार सुना हो. प्रियंका गाँधी चुनाव क्यों नहीं लड़ रही हैं, राहुल गाँधी अपनी परंपरागत अमेठी की सीट को छोड़कर रायबरेली क्यों चले गए ये चर्चा का अलग विषय है लेकिन जहाँ तक बात किशोरी लाल शर्मा की है तो उनका अमेठी से चार दशकों पुराना नाता है, रायबरेली से भी पहले वो अमेठी से तब जुड़े जब राजीव गाँधी ने उन्हें 1983 में अमेठी में कोऑर्डिनेटर के रूप में तैनात किया और तबसे वो लगातार अमेठी और फिर बाद में सोनिया गाँधी के रायबरेली जाने के बाद वहां उनके प्रतिनिधि के रूप में काम करते रहे.

किशोरी लाल शर्मा वैसे तो लुधियाना पंजाब के हैं लेकिन उनकी कर्मस्थली अमेठी और रायबरेली रही है वो भी दशकों पुरानी। गाँधी परिवार और क्षेत्र की जनता के बीच वो एक पुल तरह काम कर रहे थे. क्षेत्र की जनता की हर समस्या को गाँधी परिवार तक पहुँचाना उनका काम था और हर संभव उसका निपटारा भी, इसलिए अमेठी और रायबरेली के लोगों से उनका सम्बन्ध बहुत करीबी था. शर्मा जी को गाँधी फैमिली का वफादार माना जाता है, ऐसे ज़माने में जब पता नहीं कितने कांग्रेसी नेता कांग्रेस के बुरे वक्त में पार्टी का हाथ झटककर सत्ता की गोद में जा बैठे लेकिन किशोरीलाल शर्मा की वफादारी में किसी भी तरह की कोई कमी नहीं आयी, यही वजह है जब ये तय हुआ कि अमेठी से गाँधी परिवार के बाहर के किसी व्यक्ति को चुनाव लड़ाया जाय तो किशोरी लाल शर्मा से बेहतर कोई उम्मीदवार कांग्रेस को नज़र नहीं आया. ये भी कहा जा सकता है कि दशकों की वफ़ादारी का कांग्रेस पार्टी ने उन्हें इनाम दिया है.

किशोरी लाल शर्मा दर्जनों चुनाव लड़वा चुके हैं, चुनाव लड़ने का उन्हें काफी तजुर्बा है, दोनों ही क्षेत्रों के चप्पे चप्पे और लोगों से वो वाकिफ हैं. फिर चार दशकों से वो वहीँ पर रह रहे हैं, भले ही गाँधी परिवार का इस दौरान प्रतिनिधित्व न रहा हो लेकिन किशोरी लाल शर्मा वहीँ पर जमे रहे और कांग्रेस पार्टी का प्रतिनिधित्व करते रहे. अमेठी में उनका मुकाबला उन स्मृति ईरानी से है जिन्होंने राहुल गाँधी को चुनाव में हराया। अब देखना होगा कि पिछले चार दशकों से अमेठी से जुड़ाव का उन्हें और कांग्रेस पार्टी को कोई फायदा मिलेगा या नहीं।

जहाँ तक उनके स्वभाव की बात है तो वो बहुत ही मृदुभाषी हैं, चेहरे पर हमेशा मुस्कराहट रहती है. कांग्रेस पार्टी की ओर से लिया गया फैसला पहली नज़र में तो अमेठी की राजनीति और रणनीति के हिसाब से बहुत अच्छा फैसला कहा जा सकता है. पिछले दो दिनों से जब ये बात लगभग स्पष्ट हो गयी कि राहुल गाँधी यूपी से भी चुनाव लड़ेंगे तो भाजपा ने ये मानकर कि राहुल चुनाव लड़ेंगे तो अमेठी से ही लड़ेंगे, एक नैरेटिव बनाना शुरू किया कि राहुल गाँधी ने अमेठी के लोगों को धोखा दिया है. चुनाव में हार उन्हें बर्दाश्त नहीं हुई और एक हार ने उन्हें अपना परिवार बदलने पर मजबूर कर दिया। हमेशा अमेठी को अपना परिवार कहने वाले राहुल गाँधी ने वायनाड को अपना नया परिवार बना लिया। स्मृति ईरानी अपनी सभाओं में लगातार ये बात कहती रहीं कि क्या कभी कोई परिवार भी बदल सकता है. अब वो वायनाड छोड़कर अमेठी आ रहे हैं, जिसे उन्होंने कभी अपना परिवार समझा ही नहीं, समझा होता तो अमेठी से जुड़े रहते , परिवार से जुड़े रहते। ऐसे में किशोरी लाल शर्मा को अमेठी से उतारकर कांग्रेस ने इस नैरेटिव की हवा निकालने की कोशिश की है क्योंकि किशोरी लाल शर्मा ने राहुल गाँधी की हार के बावजूद अमेठी नहीं छोड़ा। रायबरेली में सोनिया गाँधी के प्रतिनिधि के रूप में काम करने के साथ ही वो अमेठी में कोऑर्डिनेटर के रूप में भी लगातार बने रहे और अमेठी और गाँधी परिवार के बीच सूत्रधार का काम करते रहे.

अब चुनाव में नतीजा क्या आएगा ये तो 4 जून को पता चल जायेगा लेकिन कांग्रेस ने स्मृति ईरानी को वाक ओवर नहीं दिया है, इतना तो पक्का है. इसके साथ ये भी तय है कि शर्मा जी को अपने अनुभव और जनता से जुड़ाव का लाभ भी ज़रूर मिलेगा। स्मृति ईरानी और भाजपा भले ही के एल शर्मा को हल्का उम्मीदवार माने लेकिन शर्मा जी हलके उम्मीदवार तो कतई नहीं हैं. चुनाव जीतने के लिए ज़मीनी लड़ाई जीतनी ज़रूरी होती है, इसलिए बड़े नेता अपने साथ ऐसे लोगों को हमेशा साथ रखते हैं जो ज़मीन पर रहकर उनके लिए काम करते हैं, के एल शर्मा से ज़्यादा जमीनी राजनीती का तजुर्बा शायद ही किसी के पास होगा। मेरे हिसाब से तो गैर गाँधी परिवार से कोई नाम मिशोरी लाल शर्मा से अच्छा हो ही नहीं सकता। अब देखना होगा कि वो अपने तजुर्बे को अपने चुनाव में कितना और किस तरह इस्तेमाल करते हैं, फिलहाल कांग्रेस ने किशोरी लाल शर्मा को अमेठी से उतारकर स्मृति ईरानी को झटका तो ज़रूर दिया है, उनकी सारी सियासत राहुल गाँधी के इर्द गिर्द ही रहती है, ऐसे में उन्हें अब नए सिरे से अपने चुनावी रणनीति बनानी होगी, वो भी जानती है कि किशोरीलाल शर्मा को हलके में लेना भारी भूल होगी।

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

बयानों के बीच संघ प्रमुख से मिलेंगे योगी आदित्यनाथ, क्या हैं मायने

लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद पहली बार यूपी के...

नालंदा विश्वविद्यालय के नए परिसर का पीएम मोदी ने किया उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को बिहार के राजगीर...

क़ुरबानी के जानवर हाज़िर हों, WC से बाहर होने के बाद हफ़ीज़ का अनोखा सन्देश

पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मोहम्मद हफीज ने...

नीट-यूजी परीक्षा: NTA की याचिका पर निजी पक्षों को नोटिस, सुनवाई 8 जुलाई को

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए)...