आज श्राद्ध का दूसरा दिन है। घर में श्राद्ध हो उस दिन गीता का सातवें अध्याय का पाठ करें। पाठ करते समय एक पात्र में जल भर के रखें। पाठ पूरा हो तो जल सूर्य भगवन को अघ्र्य दें। इसके बाद कहें कि हमारे पितृ के लिए हम अर्पण करते हैं। जिनका श्राद्ध है उनके लिए आज का गीता पाठ अर्पण। ’अगर पंडित से श्राद्ध नहीं करा पाते हैं तो सूर्य नारायण के आगे अपने दोनों हाथ खुले करके (दोनों हाथ ऊपर करके) बोलें हे सूर्य नारायण! मेरे पिता या जो भी हैं उनका (नाम), अमुक (नाम) का बेटा, अमुक जाति (नाम), (अगर जाति, कुल, गोत्र नहीं याद तो ब्रह्म गोत्र बोल दे) को आप संतुष्ट और सुखी रखें। इस निमित मैं आपको अघ्र्य व भोजन कराता हूँ। ऐसा करके आप सूर्य भगवान को अघ्र्य दें और भोग लगायें। श्राद्ध और यज्ञ आदि कार्यों में तुलसी का एक पत्ता महान पुण्य देने वाला माना गया है।
इसके अलावा श्राद्ध के लिए इस विशेष मंत्र ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वधादेव्यै स्वाहा, का जप करके हाथ उठाकर सूर्य नारायण को पितृ की तृप्ति एवं सदगति को प्रार्थना करें। स्वधा ब्रह्माजी की मानस पुत्री हैं। इस मंत्र के जप से पितृ तृप्ति अवश्य होती है और श्राद्ध में जो त्रुटी रह गई वे भी पूर्ण हो जाती है। श्राद्ध पक्ष में एक माला रोज द्वादश मंत्र यानी ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करना चाहिए। उस माला का फल नित्य अपने पितृ को अर्पण करना चाहिए।

