क्रिकेटर शिखर धवन ने नाव में बैठकर पक्षियों को दाना खिलाया था
बर्डफ्लू के चलते पंक्षियों को कुछ भी खिलाने पर लगा है पूर्ण प्रतिबंध
प्रशासन ने शिखर धवन को दी क्लीन चिट, नाविक पर लगाया प्रतिबंध
सुनील शर्मा
वाराणसी। क्रिकेटर शिखर धवन को नाव में बैठाकर गंगा की सैर कराने को लेकर उत्साहित नाविक ने शायद ही कभी यह सोच होगा कि यह सफर उसके लिये नुकसानदेह साबित होेगा। क्रिकेटर शिखर धवन ने उसकी नाव में बैैठकर गंगा के बीच पक्षियों को दाना खिलाया तो इस बात पर प्रशासन ने उसका चालान काटते हुुए उसके नाव चलाने पर तीन दिन का प्रतिबंध लगा दिया। इस मामले में बिना उपयुक्त स्पष्टीकरण के शिखर धवन को क्लीनचिट देने वाले प्रशासन ने नाविक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बात कही है।
समरथ को नहं दोष गुसाईं, कुछ ऐसा ही देखने को मिला वाराणसी प्रशासन की कार्रवाई से जिसके किसी शख्सियत के नियम उल्लंघन की सजा नाविक को दे डाली। दरअसल हुआ यूं कि काशी में मां गंगा के दर्शन के लिये आये क्रिकेटर शिखर धवन ने नाव में बैठकर गंगा की सैर की। इस दौरान गंगा के बीच पहुंचकर नाव में बैठे शिखर धवन ने पक्षियों का न सिर्फ दाना खिलाया बल्कि उसके फोटो सोशल मीडिया पर शेयर भी कर दिया। सोशल मीडिया पर फोटो वायरल होते ही जिला प्रशासन का गुस्सा नाव चालक पर उतरा और उन्होंने उसका चालान काटते हुुए उसके नाव चलाने पर तीन दिन का प्रतिबंध लगा दिया। वहीं वाराणसी के डीएम कौशल राज शर्मा ने नाविक पर भी कार्रवाई करने की बात कही है।
पक्षियों को दाना खिलाने वाले क्रिकेटर शिखर धवन को क्लीन चिट देते हुए वाराणसी प्रशासन का कहना है कि शिखर धवन को पक्षियों को दाना खिलाने पर लगाये गये प्रतिबंध के बारे में जानकारी नहीं थी। मगर नाविक को मालूम था कि ऐसा करने पर रोक है और उसे शिखर धवन को इस बाबत जानकारी देनी चाहिये थी। इसको नाविक की गलती मानते हुए जिला प्रशासन ने नाविक प्रदीप साहनी और चालक सोनू पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। जिसके बाद दशाश्वमेघ थाने की पुलिस ने चालान काटते हुए नाव चलाने पर तीन दिन का प्रतिबंध लगा दिया है।
यहां पर सवाल यह खड़ा होता है माना शिखर धवन ने गलती अंजाने में की लेकिन क्या उनको इस संबंध में कोई नोटिस जारी किया गया या उनकी ओर से कोई अधिकारिक स्पष्टीकरण आया। क्या क्रिकेटर शिखर धवन जैसी शख्सियत को एक नाव चलाने वाला दाना खिलाने से रोक सकता था। क्या गंगा में नाव की सवारी कराने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने वाले नाविक का सावधानीपूर्वक नाव चलाने की बजाये अपनी सवारी की गतिविधियों पर ध्यान देना उचित होता। क्या सीजन के समय नाव चलाकर गुजारा करने वाले नाविक पर तीन दिन का प्रतिबंध और चालान काटने की बजाये उसको सशर्त माफी नहीं दी जा सकती थी ताकि उसका रोजगार प्रभावित न होता।

