सेफ सिटी- सिर्फ कागजी योजनाओें से नहीं मिलेगी निर्भयाओं को राहत

आर्टिकल/इंटरव्यूसेफ सिटी- सिर्फ कागजी योजनाओें से नहीं मिलेगी निर्भयाओं को राहत

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सेफ सिटी- सिर्फ कागजी योजनाओें से नहीं मिलेगी निर्भयाओं को राहत

  • हाथरस प्रकरण के बाद छवि सुुधारने में जुटी सरकार
  • पिछले साल हुआ था 17 शहरो को सेफ सिटी बनाने का फैसला
  • समय से कार्य होता तो कई निर्भया दुष्कर्मियों से बच जातीं

सुनील शर्मा

न्यूज डेस्क। हाथरस प्रकरण में हुई किरकिरी के बाद सरकार का ध्यान महिला सुरक्षा की ओर गया है। अब कोने में पड़ी सरकारी फाइलों की धूल झाड़ कर महिला सुरक्षा योजनाओं को लागू करने की तैयारी की जा रही है। इसी क्रम में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना सेफ सिटी को प्रदेश के कई शहरों में लागू करने की योजना पर कार्य शुरू कर दिया गया है।

मेरठ में भी कमिश्नर स्तर की बैठक में सेफ सिटी बनाने को लेकर निर्देश जारी किये गये। योजना निःसदेह अच्छी है मगर इस योजना पर कार्य की शुरूआत भी 10 महीने के बाद की जा रही है। इस लेटलतीफी का खामियाजा अनगिनत निर्भयाओं को अपनी अस्मत और जान देकर भुगतना पड़ा है। अब भी योजना सिर्फ कागजों और बैठक तक ही सीमित है।

लालफीताशाही की आदत के चलते न जाने कब योजना शुरू होगी, होगी भी नहीं और यदि हो गयी तो सही से क्रियांन्वित भी होगी या नहीं जैसे सवाल खड़े हो रहे हैं। क्योंकि पूर्व में भी उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा महिला सुरक्षा के लिये कई योजनाएं शुरू की गयीं लेकिन बहुत जल्द वह ठंडे बस्ते में चलीं गयीं।

दिल्ली में निर्भया और हैदराबाद में डाॅक्टर को दुष्कर्म के बाद जिंदा जलाने की घटनाओं से पूरा देश आंदोलित हो गया था। ऐसे में केंद्र सरकार की सेफ सिटी की योजना को लखनऊ के अलावा उत्तर प्रदेश के 17 शहरों में लागू करने का निर्णय लिया गया था। इन शहरों में लखनऊ के साथ कानपुर, प्रयागराज, मेरठ, अलीगढ़, बनारस, अयोध्या, मथुरा, शाहजहांपुर, सहारनपुर, गाजियाबाद, फिरोजाबाद, मुरादाबाद, आगरा, गोरखपुर, झांसी, बरेली को सेफ सिटी बनाने का निर्णय लिया गया था। मगर सरकारी काज की धीमी चाल की बदौलत यह योजना न जाने कहां फाइलों में ही खोकर रह गयी।

हालिया दिनों में हाथरस प्रकरण और उसके बाद पूरे प्रदेश में दुष्कर्म के अनेक मामले सामने आने से उत्तर प्रदेश सरकार की साख पर बट्टा लग रहा था। विपक्षी पार्टियों के अलावा सामाजिक संगठन भी प्रदेश में महिला सुरक्षा पर सवाल उठाने लगे थे। ऐसे में पुरानी योजनाओं को खंगाल कर सेफ सिटी की योजना को निकाला गया। इस योजना को लागू करने की जिम्मेदारी मंडलायुक्त को सौंपी गयी थी। इसी क्रम में सरकार ने मंडल के मेरठ व नोएडा शहर को सेफ सिटी के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। सेफ सिटी के अंतर्गत कराये जाने वाले कार्यों को लेकर कमिश्नर अनीता सी मेश्राम ने बुधवार को बैठक में निर्देश दिए। उन्होने नगरायुक्त, पुलिस व अन्य संबंधित विभागीय अधिकारियों को आठ दिन में एक्शन प्लाॅन रिपोर्ट (एपीआर) बनाने के निर्देश दिये।

सेफ सिटी योजना के अन्र्तगत शहर के मुख्य चौराहों व अन्य स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाये जायेंगे। शहर में महिलाओं की सुरक्षा के लिए पिंक बूथ, सभी शिक्षण संस्थाओं, स्कूल व कालेजों के समीप बस स्टाॅप बनाये जायेंगे। वहीं महिला सुरक्षा संबंधी सुविधाओं को व समीपवर्ती थाने आदि को शामिल करते हुए महिलाओं के लिए एक मोबाईल ऐप भी बनाया जाए। सभी सरकारी कार्यालयों व प्राईवेट संस्थानों में भी अलग से महिला शौचालय होना सुनिश्चित करने के भी आदेश दिये गये हैं।

घोषणाओं और कागजों में सिमट कर न रह जाये योजना
महिलाओं की सुरक्षा के लिये सेफ सिटी योजना आशा तो जगाती है। मगर योगी सरकार की पूर्व की योजनाएं तो घोषणाओं और फाइलों में ही सिमट कर रह गयी हैं। उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध भी इसी लापरवाही का नतीजा है। गौरतलब है कि वर्ष 2017 में पद ग्रहण करते ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने महिला सुरक्षा के लिए एंटी रोमियो स्क्वाॅयड का गठन किया था। शुरुआत में तो एंटी रोमियो स्क्वाॅयड ने ठीक काम किया।

मगर छह महीने बाद ही एंटी रोमियो निष्क्रिय हो गयी। सड़कों पर छात्राओं से छेड़खानी होती रही और एंटी रोमियो स्क्वाॅयड वाहनों के चालान काटने मेें व्यस्त रही। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छेड़छाड़, शोहदों द्वारा फब्तियां कसना, तेजाब फेंकना, मोबाइल पर परेशान करना, घरेलू हिंसा और दुष्कर्म जैसी घटनाओं को अंजाम देने वाले अपराधियों का फोटो चौराहों पर लगवाने का फरमान सुना दिया। मगर यह ऐलान भी चंद दिनो तक ही असर में रहा और यह घोषणा भी नेपथ्य में चली गयी।

ऐसे में सेफ सिटी की परिकल्पना कब धरातल पर उतरेगी और महिला सुरक्षा के लिये कितनी असरदार होगी यह तो आने वाला समय ही बतायेगा। लेकिन सिर्फ योजना का ऐलान करने या बैठक करने से नहीं बल्कि योजना को धरातल पर क्रियान्वित करने से ही महिला वर्ग की सुरक्षा संभव हो सकेगी। क्योंकि इस कार्य में जितनी देर होती रहेगी उतनी ही निर्भयाएं दरिंदगी की शिकार होती रहेंगी।

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