लैंसडौन। यूक्रेन(Russia Ukraine War) में चारों तरफ अफरातफरी का माहौल है। खाने पीने की चीजें समाप्त हो चुकी है। हालात एक महीने से खराब हैं। लेकिन वहां की मीडिया इन सब परेशानियों को दिखा नहीं रही है। यह कहना है लैसडौन की संस्कृति का जो कि यूक्रेन से रविवार को वापस लौटी है। संस्कृति ने बताया कि कैसे 80 घंटे उसके काफी चुनौतियों भरे रहे हैं। जब संस्कृति अपने घर पहुंची तो परिजनों ने चैन की सांस ली है। परिजनों का कहना है कि वे अब संस्कृति को कहीं नहीं भेजेंगे। बता दे कि संस्कृति अग्रवाल को उसके परिजनों ने मेडिकल की पढ़ाई के लिए भेजा था। पर्यटन नगरी की रहने वाली संस्कृति इसी महीने की छह तारीख को यूक्रेन गई थी। वहां पर उसका एडमिशन एमबीबीएस में हुआ था। उसने बताया कि शुरूआत में तो शहर में सब कुछ ठीक था। विदेश में मेडिकल की पढ़ाई को लेकर उसमें उत्साह था।
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लेकिन जाने के कुछ दिन बाद ही युद्ध स्थितियां बनने लगी। खाने की सामग्री के लिए सुपर मार्किट व अन्य माल्स में लोगेां की भीड़ उमड़ रही थी। वहां पर सबसे अधिक परेशानी भारतीय मूल के छात्रों को हो रही है। चारों तरफ अफरातफरी का माहौल है। घर लौटी संस्कृति ने बताया कि वह फोन पर परिजनों से संपर्क में थी। लेकिन मन में घर वापसी की चिंता थी। संस्कृति का कहना है कि उसका शहर चनीविक्सी रोमानिया बार्डर (Chanevixie Romania Border) के पास है। इसलिए वह जल्द भारत वापसी में सफल हो सकी। संस्कृति उन 152 छात्रों में है जो कि रविवार की सुबह विशेष विमान से भारत लौटी है। संस्कृति के पिता अजय अग्रवाल व्यापारी हैं और मां निशा गृहिणी है।

