मेरठ। प्रदेश विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Assembly Election) पश्चिमी से होता हुआ अब पूर्वांचल के पड़ाव पर पहुंच गया है। इस पड़ाव को जीतने के लिए सभी राजनीतिक पार्टियों ने पूरा जोर लगा दिया है। भाजपा (BJP) को सत्ता तक पहुंचने और पूर्वाचल जीतने के लिए अब आरएसएस (RSS) ने अपनी पूरी ताकत लगा दी है। इतना ही नहीं अब आरएसएस पूरी तरह से खुलकर मैदान में आ गया है। आरएसएस ने स्वयंसेवकों के साथ ही अपने आनुसांगिक संगठनो को भी चुनावी मैदान में पूरी तैयारी के साथ उतारा है। हालांकि राजनैतिक आलोचना से बचने से बचने के लिए आरएसएस ने इस आपरेशन को लोक जागरण का नाम दिया है।
Read also- पूर्वाचल में ब्राहमण को साधने केे लिए भाजपा ने मैदान में उतारी ब्राहमणों की टीम
काशी क्षेत्र (Kashi) की 71 विधानसभा सीटों पर आरएसएस ने सभी आनुसांगिक संगठनों को जिम्मेदारी सौंप दी है। इन संगठनों ने काशी की सभी 71 सीटों के लिए मोर्चा संभालकर काम करना शुरू कर दिया है। वैसे तो इन सभी विधानसभा सीटों पर जीत के लिए आरएसएस ने करीब 1800 पूर्णकालिक स्वयंसेवकों को पहले से ही कमान सौपी हुई है। ये सभी स्वयंसेवक अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए विधानसभा के प्रत्येक मतदाता से संपर्क साधने का काम कर रहे हैं। अपने इस अभियान के साथ ही आरएसएस मतदान प्रतिशत में वृद्धि की कोशिश में भी है। आरएसएस रणनीति के तहत काशी क्षेत्र के सभी 104 और 1520 न्याय पंचायतों की घेराबंदी की कोशिश कर रहा है। इसके लिए आरएसएस ने 25 स्वयंसेवकों की टोली बनाकर हर टोली को प्रत्येक विधानसभा में 350 मतदाताओं से संपर्क साधने का टास्क दिया है। आरएसएस की ये टोली प्रत्येक बस्ती,गांव में चौपाल लगाकर वोटरों को साधने का काम करेगी। चौपाल में मतदाताओं को उनके वोटों की अहमियत बताई जाएगी। आरएसएस के ये स्वयंसेवक मतदाताओं को नस्लवाद, व्यक्तिवाद, जातिवाद, आतंकवाद के साथ ही संस्कृतिक और विकास पर भी अपने विचारों से उनको प्रेरित करेंगे।

