दिल्ली से जयपुर लौटकर बोले सीएम गहलोत ‘आल इज वेल’

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जयपुर। राजस्थान में उठे सियासी घमासान के बाद हाईकमान के निर्णय पर सबकी निगाहें टिकी हैं। फैसला इस पर लिया जाना है कि गहलोत कुर्सी पर काबिज पर रहेंगे या नहीं। हालांकि दिल्ली से जयपुर लौटने पर गहलोत ने कहा कि ‘आल इज वेल’। इसके बाद वो अपनी ही स्टाइल में काम करते हुए भी नजर आ रहे हैं। गहलोत ने कई जिलों में ताबड़तोड़ दौरे किए हैं। इन दौरों का मकसद गहलोत का ‘ऑल इज वेल’ का मैसेज माना जा रहा है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से वे संदेश देना चाहते हैं कि उनकी कुर्सी को अब कुछ नहीं हो सकता। हालांकि इसी बीच उन्होंने राजस्थान में बगावत को लेकर बड़ा बयान दिया। आलाकमान तक मैसेज पहुंचाने की कोशिश की है कि राजस्थान में विधायक डरे हुए हैं।

राजनीतिक घटनाक्रम के थमने के बाद गहलोत फ्रंटफुट पर खेल रहे हैं। गहलोत 7 और 8 अक्तूबर को राजस्थान में होने वाली ‘इनवेस्ट राजस्थान समिट’ की तैयारियों में जुटें हैं। जयपुर के सीतापुरा में होने वाली इस समिट में सरकार ने 10 लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अब तक साढ़े 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्ताव सरकार को मिल चुके हैं। सीएम ने प्रदेश में 1.42 लाख करोड़ रुपये से अधिक के इनवेस्टमेंट को प्रमोशन के लिए 32 प्रोजेक्ट्स को कस्टमाइज्ड पैकेज की मंजूरी दी है। इससे प्रदेश में 32 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार के मौके मिलेंगे।

दरअसल, चार दिन पहले कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी से अशोक गहलोत और सचिन पायलट की मुलाकात के बाद से नेतृत्व परिवर्तन के फैसले का इंतजार हो रहा है। कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने गत शुक्रवार को कहा था कि एक से दो दिन में मुख्यमंत्री पर फैसला होगा। हालांकि, अब तक पार्टी की ओर से न कोई फैसला सुनाया गया और ना ही कोई संकेत दिए है। इसी बीच दिल्ली में सोनिया गांधी से माफी मांग कर लौटे गहलोत ने एक बार फिर अपने तेवर दिखाए और इशारों में साफ कर दिया कि सचिन पायलट उन्हें अपने उत्तराधिकारी के रूप में कतई मंजूर नहीं ।

गहलोत ने इशारा किया कि राज्य में अधिकतर विधायक उनके साथ ही हैं। उन्होंने कहा कि इस बात पर गौर किया जाए कि राज्य में नए मुख्यमंत्री के नाम पर विधायकों में नाराजगी क्यों बन रही है। नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति किए जाने पर 80 से 90 प्रतिशत विधायक पाला बदल लेते हैं। वे नए नेता के साथ हो जाते हैं। मैं इसे गलत नहीं मानता। लेकिन राजस्थान में ऐसा नहीं हुआ। सचिन पायलट का नाम लिए बगैर सीएम गहलोत ने कहा कि जब नए मुख्यमंत्री के आने की संभावना थी तो क्या कारण था कि उनके नाम से विधायक बुरी तरह से भड़क गए। जो कि आज तक कभी नहीं हुआ। उन्हें इतना भय किस बात का लग रहा था।

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