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Chandrayaan 3: वो कारण जिनके चलते भारत ने बनाया इतिहास, बना चांद के दक्षिण ध्रुव पर उतरने वाला पहला देश

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Chandrayaan 3 successful landing: आज भारत के लिए ऐतिहासिक दिन है। हर भारतवासी इस गौरवशाली क्षण की सफलता पर गर्व कर रहा है। हर भारतीय मिशन की सफलता के लिए सुबह से ही प्रार्थना और कामना कर रहा था। अपने तय समय पर चंद्रयान 3 मिशन सफलता पूर्वक चांद के दक्षिण ध्रुव पर उतर गया।

चंद्रयान-3 मिशन की सफलता के लिए नए उपकरण बनाए थे। एल्गोरिदम को मजबूत किया था। जिन कारण से चंद्रयान-2 मिशन चंद्रमा की सतह पर नहीं पहुंच पाया था। उन वजह को फोकर किया गया और कमियों को दूर किया गया। चंद्रयान-3 का लैंडर मॉड्यूल (एलएम) आज अपने तय समय पर चंद्रमा की सतह पर उतर गया। इसके साथ भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बन गया।

पूरी दुनिया इस ऐतिहासिक पल का इंतजार कर रही थी। लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) से युक्त लैंडर मॉड्यूल ने शाम 6.04 बजे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग की। हर कोई यह जानने को उत्सुक है कि आखिर भारत ने यह उपलब्धि हासिल कैसे की है। लेकिन इसके पीछे वो पांच वजह हैं जो मिशन की कामयाबी में भागीदार रहीं।

2019 के चंद्रयान-2 मिशन से सबक

चंद्रयान-3 से पहले 22 जुलाई 2019 को चंद्रयान-2 लॉन्च किया था। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र पर सॉफ्ट लैंडिंग की कोशिश करने वाला देश का पहला अंतरिक्ष मिशन था। चंद्रयान-2 मिशन का विक्रम लैंडर छह सितंबर 2019 को चंद्रमा पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।
इसरो वैज्ञानिकों ने मिशन से काफी सीखा। इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ ने कहा कि 2019 का मिशन चंद्रयान-2 आंशिक सफलता थी। लेकिन इससे मिले अनुभव इसरो के चंद्रमा पर लैंडर उतारने के लिए नए प्रयास में उपयोगी साबित हुए। इसके तहत चंद्रयान-3 में बहुत बदलाव किए गए।

लैंडर में पांच की जगह चार इंजन लगाए

चंद्रयान-2 के लैंडर में पांच इंजन थे। जबकि इस बार भार कम करने के लिए चंद्रयान-3 में चार इंजन लगाए थे। चंद्रयान-3 में लेजर डॉपलर वेलोसिमिट्री के साथ चार इंजन थे। जिसका उद्देश्य चंद्रमा पर उतरने के सभी चरणों में अपनी ऊंचाई और अभिविन्यास को नियंत्रित करना था।

लैंडर के पांव पहले के मजबूत बनाए

चंद्रयान-3 में किसी अप्रत्याशित प्रभाव से निपटने के लिए लैंडर के पैर को मजबूत किया। इसके साथ अधिक उपकरण, अपडेटेड सॉफ्टवेयर और बड़ा ईंधन टैंक लगाया था। ऐसा इसलिए किया कि यदि अंतिम मिनट में बदलाव करना पड़ा तो ये उपकरण महत्वपूर्ण हो सकें।

चंद्रयान 3 की लैंडिग का क्षेत्रफल बढ़ाया

इसरो ने चंद्रयान-2 से सबक लेते हुए चंद्रयान-3 में काफी बदलाव किए थे। चंद्रयान-2 के उतरने के लिए चंद्रमा का जितना एरिया निर्धारित किया था। उसमें काफी बढ़ोत्तरी की गई। चंद्रयान 3 की लैंडिंग के लिए लगभग 10 वर्ग किमी क्षेत्र तय किया गया।

अल्टरनेट लैंडिंग की सुविधा से लैस

इसरो ने चंद्रयान 3 के परीक्षण के दौरान तय कर लिया था कि अगर लैंडिंग के लिए एक जगह सही नहीं तो दूसरी जगह तैयार रहेगी। चंद्रयान-3 को टारगेट स्थल से आगे-पीछे ले जाने की व्यवस्था बनाई गई थी। जिससे कि एक किमी के दायरे में चंद्रयान 3 की सुरक्षित लैंडिंग हो सके। इसे पहले तय किया गया। चंद्रयान-3 के लिए समतल जगह का चयन किया। ऐसा इसलिए कि अगर उस समय कोई पदार्थ बीच में आया तो चंद्रयान का संतुलन नहीं बिगड़ेगा।

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