मलमास के कारण इस बार रक्षाबंधन का करना होगा लंबा इंतजार

धर्ममलमास के कारण इस बार रक्षाबंधन का करना होगा लंबा इंतजार

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रक्षा बंधन भाई-बहन के प्यार का प्रतीक है। रक्षा बंधन के दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई उसकी रक्षा का वचन लेता है। और बहनें अपनी भाइयो की लम्बी उम्र की कामना करती है पंचांग के अनुसार हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है. लेकिन, इस बार रक्षाबंधन का त्योहार मनाने के लिए आपको लंबा इंतजार करना पड़ेगा . दरअसल, इस बार अधिक मास होने के कारण सावन का महीना 59 दिनों का होने जा रहा है. ऐसे में सभी त्योहारों की तारीख थोड़ा आगे कर दी गई है. इसलिए इस बार सभी त्योहार देरी से ही पड़ेंगे , तो चलिए आपको बताते है कि रक्षाबंधन तिथि, महत्व और शुभ मुहूर्त के बारे में ।

रक्षा बंधन कब है

हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार रक्षाबंधन का त्योहार 30 अगस्त दिन बुधवार को धूमधाम से मनाया जायेगा . हालांकि रक्षाबंधन के दिन इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि भद्राकाल में राखी नहीं बांधनी चाहिए। दरअसल, भद्राकाल का अशुभ समय होता है। इसलिए बहनों को शुभ मुहूर्त में ही अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधनी चाहिए।

कब से पूर्णिमा तिथि है

पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 30 अगस्त 2023 को दोपहर 12 बजकर 29 मिनट से होगा। वहीं अगले दिन 31 अगस्त 2023 को सुबह 8 बजकर 35 मिनट तक रहेगा।

रक्षा बंधन का महत्व

रक्षा बंधन को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं। उनमें से एक भगवान इंद्र और उनकी पत्नी शची की है। इस कथा का उल्लेख भविष्य पुराण में मिलता है। जब असुरों के राजा बलि ने देवताओं पर हमला किया तो इंद्र की पत्नी शची बहुत परेशान थी। इसके बाद वह मदद के लिए भगवान विष्णु के पास पहुंची। भगवान विष्णु ने शची को एक धागा दिया और उसे अपने भाई की कलाई पर बांधने के लिए कहा जिससे उसकी जीत होगी। सती ने वैसा ही किया और इस युद्ध में देवताओं की जीत हुई । इसके अलावा रक्षा बंधन को लेकर भी महाभारत काल से जुड़ी एक कहानी है। जब शिशुपाल के साथ युद्ध के दौरान भगवान विष्णु की तर्जनी अंगुली कट गई, तो द्रौपदी ने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर उनके हाथ पर बांध दिया। इसके बाद भगवान विष्णु ने उन्हें रक्षा करने का वचन दिया था। अपने वचन के अनुसार, यह भगवान कृष्ण थे जिन्होंने चीरहरण के दौरान द्रौपदी की रक्षा की थी।

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