11 अगस्त को मनाया जाएगा रक्षाबंधन पर्व ,जानिए शुभ मुहूर्त और वैदिक राखी का महत्व

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प्रतिवर्ष श्रावणी पूर्णिमा को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। इस बार रक्षाबंधन पर्व 11 अगस्त 2022 गुरुवार के दिन मनाया जाएगा। 11 अगसत को राखी बांधने का शुभ मुहूर्त  सुबह 06ः12 से सुबह 07ः50 तक और रात्रि 08ः52 से रात्रि 09ः59 तक रहेगा। इस दिन बहनें अपने भाई को रक्षासूत्र बांधती हैं। यह रक्षा सूत्र यदि वैदिक रीति से बनाई जाए तो शास्त्रों में उसका बड़ा महत्व है। वैदिक रूप से रक्षासूत्र बनाने के लिए दूर्वा ;घास, अक्षत यानी चावल, केसर, चन्दन और सरसों के दाने की जरूरत होगी। इन सभी वस्तुओं को रेशम के कपड़े में लेकर उसे बांध दें या सिलाई कर दें। फिर उसे कलावा में पिरो दें। इस प्रकार वैदिक राखी तैयार हो जाएगी।

इन पांच वस्तुओं का महत्त्व 

दूर्वा:- जिस प्रकार दूर्वा का एक अंकुर बो देने पर तेज़ी से फैलता है और काफी संख्या में उग जाता है। उसी प्रकार भाई का वंश और उसमे सदगुणों का विकास तेज़ी से हो। सदाचार, मन की पवित्रता तीव्रता से बढ़े। दूर्वा गणेश को प्रिय है अर्थात हम जिसे राखी बाँध रहे हैं, उनके जीवन में विघ्नों का नाश हो। 

अक्षत:- हमारी गुरुदेव के प्रति श्रद्धा कभी क्षतविक्षत ना हो और वो सदा अक्षत रहे।

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केसर:- केसर की प्रकृति तेज़ है अर्थात जिसे राखी बाँध रहे हैं, वह तेजस्वी बने। जीवन में आध्यात्मिकता का तेज हो भक्ति का तेज कभी भी कम ना हो।

चन्दन:- चन्दन की प्रकृति तेज और सुगंध रूपी होती है। उसी प्रकार जीवन में शीतलता बनी रहे। मानसिक तनाव ना हो। साथ ही भाई के जीवन में परोपकार, सदाचार और संयम सुगंध फैलती रहे ।

सरसों के दाने:- सरसों की प्रकृति तीक्ष्ण रहती है यानी इससे यह संकेत मिलता है कि यह समाज के दुर्गुणों को, कंटक को समाप्त करने कर तीक्ष्ण बनाए।

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