Rajasthan Election 2023: राजस्थान में मतदान खत्म होने के बाद अब जीत और हार के समीकरण लगाए जा रहे हैं। हालांकि चुनावी नतीजे तीन दिसंबर बताएगा कि रिवाज बदलता है या कायम रहेगा। राजस्थान में कई सीटों पर ध्रुवीकरण का असर दिखाई दिया है। जिसके चलते कई सीटों पर बंपर वोटिंग हुई है।
राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में इस बार 74.13 प्रतिशत मतदान का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से अभी मतदान प्रतिशत का फाइनल डेटा जारी नहीं हुआ है। राजस्थान में इस बार मतदान प्रतिशत में बढ़ोतरी की संभावना है। जिस तरह से इस बार साइलेंट वोटिंग हुई है। उसे देखते हुए माना जा रहा है कि करीब 50 से अधिक सीटें ऐसी मानी जा रही हैं जिन पर जीत-हार का अंतर दो हजार से कम वोटों का होगा।
चुनाव की बात करें तो राजस्थान मुख्यमंत्री सीएम अशोक गहलोत की गारंटियों और जातिगत जनगणना के वादों का मुकाबला मोदी के हिन्दुत्व और पेपर लीक मुद्दों के बीच हुआ है। हालांकि, स्थानीय विधायक की छवि को लेकर मतदान पर काफी असर देखने को मिला।
धार्मिक ध्रुवीकरण का कार्ड खूब चला
भाजपा के प्रचार में सबसे अधिक जोर तुष्टीकरण के मुद्दे पर रहा। कन्हैयालाल हत्या का जिक्र पीएम से लेकर तमाम भाजपा नेताओं ने किया। इसका असर मतदान पर साफ नजर दिखा। धार्मिक ध्रुवीकरण में फंसी सीटों पर इस बार रिकॉर्ड तोड़ मतदान हुआ है।
तिजारा में दिवाली का माहौल
तिजारा में पिछले चुनाव में 80.85 फीसद वोटिंग हुई थी। इस बार मतदान ने 85.15 प्रतिशत का आंकड़ा छू लिया है। वजह है, यहां भाजपा के भगवाधारी बाबा बालकनाथ का मुकाबला कांग्रेस के इमरान खान से था। इस सीट पूरा प्रचार हिंदू-मुस्लिम के मुद्दे को लेकर हुआ। मतदान खत्म होने के बाद जमकर आतिशबाजी की गई। भाजपा कार्यकर्ताओं ने नरेंद्र मोदी और भगवान राम के नारे लगाए।
पोकरण में दो धर्मगुरुओं के बीच टक्कर
पोकरण पाकिस्तान की सीमा से सटी विधानसभा सीट है। पोकरण में दो धर्मगुरुओं के बीच मुकाबला है। वर्तमान विधायक कैबिनेट मंत्री सालेह मोहम्मद हैं। उनके पिता गाजी फकीर सिंधी मुस्लिम धर्मगुरु थे। अब उनके निधन के बाद वह अगले धर्मगुरु बने है। यहां सालेह मोहम्मद का मुकाबला बीजेपी के महंत प्रतापपुरी से है। जो तारातरा मठ के प्रमुख हैं। इस मठ का प्रभाव पूरे पश्चिम राजस्थान में है। दो धर्मगुरुओं के बीच मुकाबले ने यहां मतदान के पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। पिछले चुनावों में पोकरण में 81.12 प्रतिशत मतदान हुआ था। जबकि इस बार मतदान का आंकड़ा 87.79 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
चुनाव में दिखी जातियों की लड़ाई
राजस्थान में इस बार के विधानसभा चुनाव 2023 में एक बड़ी लड़ाई गुर्जर वोटों पर कब्जे की रही। चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट और उनके पिता राजेश पायलट के साथ कांग्रेस द्वारा किए व्यवहार को मुद्दा बनाया। इसके जवाब में सीएम अशोक गहलोत ने भाजपा राज के समय गुर्जर आंदोलन के दौरान गोलीबारी और 72 गुर्जरों की मौत की याद दिलाई है।
कई जगह नजर आई धर्म की लड़ाई
भाजपा ने प्रचार में कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार, महिला उत्पीड़न और पेपर लीक को मुद्दा बनाया। लेकिन सबसे अधिक फोकस हिन्दुत्व के आधार पर मतों का ध्रुवीकरण था। भाजपा स्टार प्रचारकों ने चुनावी भाषणो में खुलकर इसकी बात की।
BJP ने नहीं दिया किसी मुस्लिम को टिकट
भाजपा ने इस बार राजस्थान चुनाव में किसी मुस्लिम को प्रत्याशी नहीं बनाया। वसुंधरा राजे के नजदीकियों में कई को टिकट मिला। लेकिन उनके सबसे विश्वस्त रहे पूर्व मंत्री युनूस खान को भाजपा ने टिकट नहीं दिया। स्थिति यह तक आई कि एक प्रत्याशी अभिषेक सिंह, जिसे मसूदा से टिकट मिला था। उसके बारे मे जब यह पता चला कि वह मूल रूप से मुस्लिम हैं तो अंतिम समय में टिकट बदल दिया।
भगवाधारियों को भाजपा ने बांटे टिकट
भाजपा ने इस बार तीन संतों को टिकट दिए। इनमें पोकरण से महंत प्रतापपुरी, हवामहल से हाथोज धाम के महंत बाल मुकुंदाचार्य और तिजारा से नाथ सम्प्रदाय के बाबा बालकनाथ को प्रत्याशी बनाया। इनमें से प्रतापपुरी और बालकनाथ के सामने कांग्रेस की तरफ से क्रमशः सालेह मोहम्म्द और इमरान खान के रूप में मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में हैं।

