करोनाकाल में रेलवे बना संकटमोचक देश भर में पहुंचाया 20,000 टन से अधिक ऑक्सीजन (oxygen)

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करोनाकाल में रेलवे बना संकटमोचक देश भर में पहुंचाया 20,000 टन से अधिक ऑक्सीजन (oxygen)

धीरज उपाध्याय

देश भर में करोना की दूसरी लहर में अप्रैल और मई महीने में स्थिति भवायह होने के बाद  सबसे ज्यादा किल्लत ऑक्सीजन (oxygen) की देखने को मिली। इस कमी से निपटने और मरीजों और अस्पतालों को ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित कराने के लिए केंद्र सरकार ने भारतीय रेल के सहयोग से देश के विभिन्न राज्यों में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) पहुंचाकर करोना संक्रमण की मृत्यु दर को कम करने मे कामयाब हुई। इसी के साथ सरकार ने देश के विभिन्न अस्पतालों में क्षमतानुसार ऑक्सीजन प्लान्ट लगाने का भी फैसला किया जिससे भविष्य में गंभीर मरीजों को बिना रुकावट ऑक्सीजन (oxygen) उपलब्ध करायी जा सके। रेलवे ने राहत पहुंचाने की अपनी यात्रा को जारी रखते हुए, देश के विभिन्न राज्यों में मई अंत तक 1237 से अधिक टैंकरों में 20,770 मीट्रिक टन से अधिक एलएमओ पहुंचाकर अनगिनत मरीजों की जान बचायी हैं।

इसी तरह भारतीय रेलवे ने सिर्फ ऑक्सीजन (oxygen) ही नहीं बल्कि अन्य जरूरी समानों की आपूर्ति को भी बिना रुकावट सुनिश्चित किया हैं। रेलवे द्वारा जारी मई के आंकड़ों के अनुसार भारतीय रेलवे ने इस महीने 28 मई तक 35,015 मिलियन टन कार्गो – जैसे कोयला, कंटेनर, खनिज, अयस्क और सीमेंट – की भी माल ढुलाई की है, जो पिछले साल की समान अवधि से करीब 40 प्रतिशत अधिक हैं। रेलवे ने अभी तक चालू वित्त वर्ष के लिए सालाना आधार पर 51.46 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाते हुए 72,771 मिलियन टन कार्गो को अपने गंतव्य स्थान तक पहुंचाया है। हालांकि पिछले वर्ष इस करोना के चलते देश भर में पूर्ण लाकडाउन के कारण ये आंकड़ा अधिक है पर सामान्य स्थिति में ये औसत आंकड़ा हैं ।

भारत इस समय करोना की दूसरी लहर का सामना कर रहा है, इस साल लॉकडाउन की प्रकृति अलग है। वहीं इस साल दूसरी लहर में रेलवे ऑक्सीजन एक्सप्रेस चला रहा है – जो देश के विभिन्न हिस्सों में ऑक्सीजन पहुंचाने वाली मालगाड़ियाँ हैं। रेलवे के मुताबिक, ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने 35 दिन पहले 24 अप्रैल को अपनी डिलीवरी शुरू की थी।

भारतीय रेलवे अब पश्चिम में हापा, वडोदरा, मुंद्रा और पूर्व में राउरकेला, दुर्गापुर, टाटानगर, अंगुल जैसे स्थानों से ऑक्सीजन लेता है और फिर इसे उत्तराखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तमिल राज्यों में पहुंचाता है। हालांकि परिचालन की जटिलताओं के बावजूद इसने तमिलनाडु, हरियाणा, तेलंगाना, पंजाब, केरल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और असम को सप्लाई पहुंचायी।

इसी क्रम में असम को अपनी तीसरी ऑक्सीजन एक्सप्रेस शनिवार को चार टैंकरों में 80 मीट्रिक टन तरल चिकित्सा ऑक्सीजन (LMO) के साथ मिली। दक्षिणी राज्यों में, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना में एलएमओ की डिलीवरी 1600 मीट्रिक टन को पार कर गई। ऑक्सीजन एक्सप्रेस द्वारा ऑक्सीजन राहत 15 राज्यों-उत्तराखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, हरियाणा, तेलंगाना, पंजाब, केरल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, झारखंड और असम तक पहुंची।

अब तक ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने देश भर के 15 राज्यों के लगभग 39 शहरों/कस्बों में एलएमओ को उतारा है, जिनमें उत्तर प्रदेश के लखनऊ, वाराणसी, कानपुर, बरेली, गोरखपुर और आगरा, मध्य प्रदेश के सागर, जबलपुर, कटनी और भोपाल, नागपुर, नासिक, पुणे शामिल हैं। , महाराष्ट्र में मुंबई और सोलापुर, तेलंगाना में हैदराबाद, हरियाणा में फरीदाबाद और गुरुग्राम, दिल्ली में तुगलकाबाद, दिल्ली कैंट और ओखला, राजस्थान में कोटा और कनकपारा, कर्नाटक में बेंगलुरु, उत्तराखंड में देहरादून, आंध्र प्रदेश में नेल्लोर, गुंटूर, तड़ीपत्री और विशाखापत्तनम केरल में एर्नाकुलम, तमिलनाडु में तिरुवल्लूर, चेन्नई, तूतीकोरिन, कोयंबटूर और मदुरै, पंजाब में भटिंडा और फिल्लौर, असम में कामरूप और झारखंड में रांची।

रेलवे ने ऑक्सीजन आपूर्ति स्थानों के साथ विभिन्न मार्गों की मैपिंग भी की है इसकी को देखते हुए रेलवे के सभी ज़ोनल अधिकारियों ने राज्यों की तरफ से अचानक उत्पन्न होने वाले किसी भी आपातस्थिति से निपटने के लिए एक विशेष रणनीति भी बनायीं है। बता दे कि एलएमओ लाने के लिए राज्य भारतीय रेलवे को टैंकर प्रदान करते हैं और रेलवे उसे विभिन्न प्लांटों से रीफिलिंग के बाद पहुंचता हैं।

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