अमित बिश्नोई
कश्मीर के श्रीनगर में आज मौसम बड़ा बेईमान था, बूंदाबांदी के साथ ही आसमान से बर्फ भी बरस रही थी, लेकिन भारत यात्रियों के चेहरे पर कोई शिकन नहीं दिख रही थी, सबके चेहरे पर एक संतोष का भाव, एक बड़ा काम पूरा करने की संतुष्टि नज़र आ रही थी. शेरे कश्मीर क्रिकेट स्टेडियम में भारत जोड़ो यात्रा का यह समापन कार्यक्रम था, खराब मौसम के बावजूद काफी लोग वहां मौजूद थे. समापन भाषण राहुल गाँधी का था और आज उनका भाषण पूरी यात्रा का सार था, कुछ बातों का खुलासा था, कुछ पुरानी बातों का ज़िक्र, कुछ अध्यात्म की चर्चा और कुछ भावुकता के पल, पुलवामा के शहीद परिवारों के दर्द का ज़िक्र भी, आतंकी हिंसा के शिकार कश्मीरियों के पीड़ा की चर्चा भी और इन सबके साथ आपबीती के भावुक पलों का खुलासा भी.
भारत जोड़ो यात्रा समाप्त हो गयी, इसका आगे क्या असर पड़ेगा, इसका कोई चुनावी फायदा कांग्रेस को मिलेगा? भाजपा इस यात्रा से उभरे एक नए सियासी उभार और नई सोच का क्या काउंटर करेगी, इन सब बातों का ज़िक्र फिर कभी, आज बात सिर्फ राहुल के भाषण की. कभी किसी को ऐसे फोन काल न उठाना पड़े जैसे उन्होंने उठाये। राहुल के इन शब्दों में आपको हर उस इंसान का दर्द नज़र आएगा जिसका परिवार किसी हिंसा का शिकार हुआ. फिर राहुल का यात्रा का लक्ष्य बताते हुए यह कहना कि एक ही लक्ष्य, और वो ये कि लोगों के पास ऐसे फ़ोन काल आना बंद हो जाएँ।
राहुल ने यह शब्द बोलने से पहले अपनी आप बीती लोगों को बताई कि कैसे उन्हें स्कूल में प्रिंसिपल ने बुलाकर वो फ़ोन रिसीव कराया जिसमें उनके घर की एक सहयोगी उन्हें चिल्लाती हुई कहती है ” राहुल बाबा! दादी को गोली मार दी, दादी को गोली मार दी, दादी को गोली मार दी. फिर राहुल का यह यह कहना कि उनके पैर कांपने लगे. घर जाकर उस जगह को देखना जहाँ उनकी दादी इंदिरा गाँधी का खून पड़ा था. राहुल बात को आगे बढ़ाते हैं, कहते हैं वो अमेरिका में थे फिर एक फ़ोन आया, बिलकुल उसी तरह जैसे पुलवामा के शहीद जवानों के परिवारों को आया होगा, जैसे हज़ारों कश्मीरियों के परिवारों को आया होगा।
राहुल अपनी स्टोरी टेलिंग को बड़ी सादगी से आगे बढ़ाते हैं और कहते हैं कि उन्हें पापा के एक दोस्त का फोन आया जब वो अमेरिका में थे, उन्होंने कहा कि एक बुरी खबर है, मैंने कहा-हाँ, पापा मर गए और टेलीफोन रख दिया। इन दोनों घटनाओं का बड़ी सादगी से ज़िक्र करते हुए जब वो कहते हैं कि इस दर्द को मोदी, शाह या अजीत डोवाल कभी नहीं समझ सकते तो कहीं न कहीं उनमें एक राजनीतिक परिपक्वता झलकती है. अपने दर्द को कश्मीरियों से, आतंकी वारदातों में शहीद होने वाले जवानों के साथ आज उन्होंने बड़ी समझदारी से जोड़ा। राहुल के भाषण के यह हिस्सा सुनकर कोई भी भावुक हो सकता है, वहां पर मौजूद लोगों की भी आँखें भरी हुई थीं.
राहुल के भाषण में आज उस टी शर्ट के पहनने की वजह का भी खुलासा था कि कैसे उन्हें टी शर्ट में यात्रा करने की प्रेरणा मिली। यह प्रेरणा भी बड़ी मार्मिक थी जिसे राहुल ने बड़े ही आत्मीय अंदाज़ बयान किया और उन दो लड़कों की कहानी बताई जो फटे पुराने कपड़ों में राहुल से मिले थे और वहीँ पर राहुल ने तय किया कि जब यह बच्चे ऐसे हालात में जी रहे हैं, जीवन से संघर्ष कर रहे हैं तो उन्हें भी बिना जैकेट के यात्रा पर चलना चाहिए। इसके आलावा उस लड़की का पत्र जिसको पढ़ने के बाद राहुल के पैर का दर्द गायब हो गया, बड़ी सुंदरता से वर्णन हुआ. कह सकते हैं कि राहुल के आज के भाषण से कोई भी प्रभावित हो सकता है, विरोधी भी.

