- नवेद शिकोह
कोरोना महामारी की ज्यादतियों में आम जनता को बिना किसी लॉकडाउन या आर्थिक सहायता के खुद अपनी जान की रक्षा भी करनी है और जीविका को भी जारी रखना है। इस बार घर पर बैठकर किसी गरीब को वसीक़ा (आर्थिक सहायता) मिलने की उम्मीद कम ही है।
उत्तर प्रेदेश में कोरोना संक्रमण के बिगड़ते हालात से निपटने के लिए इस बार आम जनता को अपनी अहम भूमिका निभाने पड़ेगी। पिछले वर्ष शुरू हुए कोरोना काल में लम्बे समय तक लॉकडाउन लगाकर संक्रमण की चेन तोड़ने की कोशिश की गई थी। दिनों-रात लाखों सुरक्षा बलों की मुश्तैदी से लैस लॉकडाउन से सरकार को आर्थिक हानि सहनी पड़ी थी। व्यवसायिक प्रतिष्ठान, दुकाने और शॉपिंग माल बंद रहने के कारण सरकार को भारी राजस्व का नुकसान हुआ था। रोज कुआं खोद कर रोज पानी पीने वाले मेहनतकश मजदूरों, रिक्शे और टैक्सी वालों, ठेले वालों… को कर्ज और आर्थिक सहायता दी गई थी। गरीबों के खाते में मामूली रकम डाली गई थी। फ्री में पर्याप्त राशन बंटा था। इस तरह लॉकडाउन सरकार के लिए आर्थिक बोझ बन गया था।
कोरोना आर्थिक नुकसान का कारण नहीं बने इसलिए सरकार छोटी-बड़ी जीविका के स्रोत ठप्प नहीं करना चाहती। आम जनता को खुद सोशल डिस्टेंसिंग और तमाम एहतियातों के साथ संक्रमण से अपनी रक्षा भी करनी है और जीविका के साधनों से भी जुड़े रहना है।
जीवन और जीविका दोनों को बचाने की उद्देश्य में उत्तर प्रदेश सरकार लॉकडाउन नहीं लगाएगी। ये बात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहकर सूबे की आम जनता को कोरोना से लड़ने और बचने की बड़ी ज़िम्मेदारी दे दी है। अब जनता को खुद एहतियात बरतनी है । काम भी करते रहना है और हर एहतियात भी बरतनी है।

