तेहरान। कड़े हिजाब नियमों का पालन नहीं करने पर मोरल पुलिस की हिरासत में 22 साल की कुर्दिश महशा अमीनी की मौत के बाद से महिला आंदोलन तेजी से बढ़ता जा रहा है। हिजाब के खिलाफ शुरू हुआ महिलाओं का आंदोलन अब शांत होता नहीं दिख रहा। ये आंदोलन अब तक ईरान के 80 से अधिक शहर की महिलाओं के गुस्से की चपेट में आ चुके हैं। सड़कों पर प्रदर्शन कर रही महिलाएं सरकार विरोधी नारेबाजी कर रही हैं। जिनका निशाना असल में देश का इस्लामिक शासन और सर्वाेच्च नेता अयातुल्लाह अली खामनेई को बनाया हैं। ईरानी टीवी के अनुसार, इस मामले पर हुई हिंसक झड़पों में अब तक 26 लोगों की मौत हुई है। हाल के सालों में ईरान में ऐसा आंदोलन अभी तक नहीं देखा गया था।
देश के मशहद, क्यूचेन, शिराज, तबरिज और कारज आदि शहरों में प्रदर्शनकारियों के साथ हुई झड़पों में कम से कम पांच सुरक्षाकर्मियों की भी मौत हो चुकी है और काफी लोग घायल हैं। देश में इस्लामी कानून के तहत लगी कड़ी पाबंदियों की आग में महशा की मौत ने आग में घी डाल दिया है। पिछले कुछ दिन से देश के कानूनों के प्रति अवज्ञा का प्रदर्शन करने के लिए महिलाओं ने सड़कों पर प्रदर्शन के दौरान अपने हेडस्कार्फ को आग लगाई। क्यूम और इस्फान जैसे धार्मिक सहित कई शहरों में प्रदर्शन करते हुए सर्वाेच्च नेता खामनेई के पोस्टर जलाए गए हैं। जनवरी 2020 में अमेरिका के ड्रोन हमले में मारे गए रिवोल्यूशनरी गार्ड के कमांडर कासिम सुलेमानी के गृह नगर केरमान में पोस्टर फाड़कर आग के हवाले कर दिए। सुलेमानी को सीरिया और ईरान में ईरान रणनीतिक ताकत का प्रतीक माना जाता है।

