नई दिल्ली। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने केरल की एक विशेष अदालत में रिमांड के लिए दायर अर्जी में कहा कि पीएफआई के पदाधिकारी, सदस्य और इससे जुड़े लोग केरल में संवेदनशील युवाओं को भड़काकर आईएस, लश्कर ए ताइबा, अलकायदा आदि आतंकी समूहों में भर्ती के लिए तैयार करते थे। ये लोग आतंकी गतिविधियों के माध्यम से देश में इस्लामिक शासन स्थापित करने की साजिश कर रहे थे। इसमें यह भी कहा है कि पीएफआई सदस्य समुदायों के बीच दुश्मनी भड़काने के साथ ही सौहार्द को खत्म करने में लगे थे।
एनआईए ने अपने इस दावे को पीएफआई की शैक्षिक शाखा के प्रभारी करमन अशरफ मौलवी के खिलाफ न्यायिक हिरासत की मांग वाले आवेदन में किया है। वहीं, नेताओं की बनी हिट लिस्ट से भी ये साफ है कि पीएफआई, अपने नेताओं और सदस्यों के जरिये काम कर रही थी। ये संगठन समुदायों के बीच दुश्मनी भड़काने में बहुत आगे निकल चुका है। इन दस्तावेज के आधार पर एनआईए ने कोर्ट को बताया कि मामले में जांच सिर्फ सबूत जुटाने के लिए ही नहीं बल्कि समाज में खून-खराबा रोकने के लिए जरूरी है।
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा है कि शुक्रवार को राज्य में पीएफआई की हड़ताल के दौरान हिंसा पूर्वनियोजित थी। उन्होंने मामले में सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। उन्होंने कहा कि सारी घटना राज्य के शांतिपूर्ण माहौल को बिगाड़ने के लिए की गई।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने कहा है कि उनकी सरकार इस बात को लेकर आश्वस्त है कि पीएफआई को प्रतिबंधित करना चाहिए और हम लगातार इसके लिए केंद्र सरकार से अनुरोध भी कर रहे हैं। हम चाहते है कि केंद्र सरकार आतंकी गतिविधियों के लिए माहौल बनाने के लिए इस संगठन के खिलाफ कठोर कार्रवाई करे।

