मेरठ। रूस यूक्रेन युद्ध (Russia ukraine war) का असर अब देश के आम आदमी की रसोई तक पड़ने लगा है। युद्ध की आंच से जहां लोगों की जेब झुलस रही है। वहीं दूसरी ओर रोजमर्रा की चीजों के दाम भी बढ़ गए हैं। कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गए हैं। चुनावी माहौल की वजह से पिछले साढ़े चार महीने से देश में पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढे थे। लेकिर अब कंपनियों ने दाम बढ़ाए तो इसका असर आलू पर भी पड़ा है। पेट्रोल—डीजल के दाम का असर से आलू दोगुने से ज्यादा महंगा हो जाता है।
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खेत से थाली तक पहुंचते में आलू पर होते हैं 10 रुपए खर्च :
एक बीघा खेत में करीब 2 से 2.5 क्विंटल आलू होता है। इस आलू की खेती कर उसको मंडी पहुंचने में करीब 8 हजार का खर्चा आता है। इसमें सभी प्रकार की लागत शामिल होती है। इस प्रकार 1 किलो आलू की खेती पर किसान की लागत करीब 4 रुपए आती है। किसान इस समय 6 से 7 रुपए किलो के हिसाब से बेच रहे हैं।
डीजल में 1 रुपया बढ़ना मतलब 4 स्टेज पर दाम :
डीजल के दाम में 1 रुपया का इजाफा होता है तो इसका असर रसोई में आने वाले आलू की कीमत पर पड़ता है। ये चार तरीके से होता है।
पहली- खेत से छोटी मंडी तक जाने में
दूसरा — छोटी से बड़ी मंडी तक जाने में
तीसरा — कोल्ड स्टोरेज में आलू रखने पर
चौथ – आलू की बुवाई और खुदाई की कीमत पर के अलावा उसकी ढुलाई में।
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इस प्रकार से डीजल के दामों (Diesel Price Hike) का असर थाली के आलू पर पड़ता है। ट्रांसपोर्टरों के अनुसार 50 क्विंटल आलू को मंडी से जयपुर मंडी तक भेजने में 20 हजार रुपये खर्च होते हैं। इस हिसाब से एक किलो आलू के ट्रांसपोर्ट पर 4 रुपये खर्चा बैठता है। ऐसे ही आलू के दाम बढ़ते चले जाते हैं।

