- ट्रूकॉलर और साइबरपीस फाउंडेशन द्वारा साथ मिलकर शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य लोगों के बीच जागरूकता फैलाना और उन्हें साइबर धोखाधड़ी से निपटने के तरीके सिखाना है, ताकि वे ऑनलाइन सुरक्षा का अनुभव प्राप्त कर सकें।
- ऑनलाइन माध्यमों के जरिए ठगी, स्पैम और धोखाधड़ी से बचने के लिए हमारे उपयोगकर्ता जो कदम उठा सकते हैं, उनके बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए पूरे भारत के 5 राज्यों में इंटरनेट सुरक्षा के बारे में प्रशिक्षण का आयोजन किया जाएगा।
भारत, 21 फरवरी, 2022: पूरी दुनिया में फोन नंबर को वेरीफाई करने तथा अनचाहे फोन कॉल को रोकने में मदद करने वाले सबसे बड़े प्लेटफॉर्म, ट्रूकॉलर ने इंटरनेट सुरक्षा के बारे में जागरूकता बढ़ाने के मजबूत संकल्प के साथ साइबरपीस फाउंडेशन के सहयोग से इंटरनेट सुरक्षा पर केंद्रित अभियान, #TrueCyberSafe को लॉन्च किया है।
ट्रूकॉलर के लिए अपने उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा, खासकर महिलाओं और कमजोर तबके के लोगों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। हम ऑनलाइन के साथ-साथ शारीरिक उत्पीड़न के खिलाफ सुरक्षा में हमेशा की तरह सबसे आगे हैं। अपनी कम्युनिटी की मदद से फोन नंबरों को स्पैम/स्कैम/धोखेबाज़ के रूप में चिह्नित करके, हम उपयोगकर्ताओं को ट्रूकॉलर की कॉलर आइडेंटिफिकेशन सर्विस की मदद से सोच-समझकर फैसला लेने में सक्षम बनाकर उन्हें ऑनलाइन उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करने में सबसे आगे हैं। यह सुविधा ऐसे फोन कॉल रिसीव करने वाले लोगों को उस नंबर को ब्लॉक या/और रिपोर्ट करने में मदद करता है, जिसकी वजह से बातचीत की प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित हो जाती है। इसके अलावा, गार्जियंस एक लोकेशन सेफ्टी ऐप है जिसका उपयोग करना बेहद आसान है, और यह लोगों को यात्रा के दौरान सुरक्षित रहने में मदद करता है।
ट्रूकॉलर ने साइबरपीस फाउंडेशन के साथ मिलकर लोगों को डिजिटल सुरक्षा का अनुभव प्राप्त करने के लिए जरूरी कौशल विकसित करने में मदद करने के लिए प्रशिक्षण देकर एक कदम आगे बढ़ाया है, ताकि उन्हें संकट के समय अच्छी तरह सोच-विचार करने और गलत इरादों को समझने में मदद मिल सके। ऑटोबॉट इन्फोसेक के साथ मिलकर तैयार किए गए सर्टिफिकेशन से लोगों को अलग-अलग तरह की धोखाधड़ी, ज़ालसाज़ी, उत्पीड़न और ठगी से निपटने में मदद मिलेगी।
इस साझेदारी के बारे में अपने विचार व्यक्त करते हुए ट्रूकॉलर इंडिया की पब्लिक अफेयर्स डायरेक्टर, प्रज्ञा मिश्रा ने कहा, “इन दिनों पूरी दुनिया में फैली महामारी और सोशल डिस्टेंसिंग की वजह से डिजिटल संचार की अहमियत काफी बढ़ गई है। हालाँकि, इस सुविधा से हम सभी को एक-दूसरे से जुड़े रहने में मदद मिली है, लेकिन इसकी वजह से हमें स्पैम और धोखाधड़ी जैसी चुनौतियों से भी जूझना पड़ा है, जिससे निजी तौर पर लोगों को काफी नुक़सान भी हुआ है। ट्रूकॉलर में हमेशा से ही लोगों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता रही है और बनी हुई है, साथ ही हम अपने उपयोगकर्ताओं और बड़े पैमाने पर आम लोगों के लिए ऑनलाइन सुरक्षा के उच्चतम मानकों को प्राप्त करने की दिशा में लगातार कोशिश कर रहे हैं। यह कार्यक्रम हमारी ओर से लगातार किए जा रहे प्रयासों का हिस्सा है, जिससे साइबर धोखाधड़ी के बारे में जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलेगी, साथ ही उपयोगकर्ता अनजान लोगों से बातचीत करते समय भी सुरक्षित रहने में सक्षम बनेंगे। आम लोगों को ये सारी बातें सिखाने के लिए साइबरपीस फाउंडेशन के साथ साझेदारी करके हमें बेहद खुशी महसूस हो रही है, और पूरे भारत में इंटरनेट से अच्छी तरह वाकिफ़ लोगों के साथ-साथ पहली बार इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले लोग भी अंग्रेज़ी एवं क्षेत्रीय भाषाओं में इस कार्यक्रम का लाभ उठाएंगे।”
इस साझेदारी पर अपनी राय जाहिर करते हुए, साइबरपीस फाउंडेशन के संस्थापक एवं वैश्विक अध्यक्ष, मेजर विनीत कुमार, ने कहा:“पिछले दो दशकों में साइबरपीस फाउंडेशन ने ऑनलाइन सुरक्षा के साथ-साथ भविष्य में सामने आने वाली समस्याओं पर जोर दिया है। महामारी की शुरुआत के बाद, हमने देखा है कि साइबर धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में बढ़ोतरी हुई है और इसलिए हमने यह सुनिश्चित करने के लिए संगठनों के साथ लगातार सहयोग किया है कि नेटिज़न्स (नई पीढ़ी के युवा) साइबर-जागरूक और साइबर-सतर्क बनें, साथ ही उन्हें अपनी आवाज़ उठाने और रिपोर्ट करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी हो। हमें अपने हेल्पलाइन पर प्रतिदिन साइबर धोखाधड़ी से संबंधित लगभग 10-11 मामले मिलते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए, हमें ट्रूकॉलर और ऑटोबॉट इन्फोसेक के साथ मिलकर काम करते हुए बेहद खुशी हो रही है। हमें यकीन है कि ऑनलाइन खतरों और सुरक्षा को समझने वाला यह कार्यक्रम इंटरनेट के उपयोग का भविष्य है। अगर हम अपने कंटेंट्स को ट्रूकॉलर की विशेषज्ञता के साथ जोड़ते हैं, तो हम सही मायने में सीखने के अनुभव को बेहतर बना सकते हैं जिसका प्रभाव नजर आएगा। हमें पूरी उम्मीद है कि, हम प्रतिभागियों को ऑनलाइन साधनों का सुरक्षित तरीके से उपयोग करने की सीख दे पाएंगे।”
इस मौके पर कर्नल निधि भटनागर, राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गृह मंत्रालय, भारत सरकार ने कहा: “आज साइबर सुरक्षा भारत के लिए चिंता के प्रमुख विषयों में से एक है। हमारे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमजोरियों का फायदा उठाकर जितने ज्यादा साइबर खतरे सामने आते हैं, हमारे लिए निजी तौर पर और राष्ट्रीय स्तर पर जोखिम भी उतना ही बढ़ जाता है। आज पूरी दुनिया आपस में जुड़ी हुई है, लिहाजा आने वाले वर्षों में इस तरह के खतरों और कमजोरियों के कई गुना बढ़ने की संभावना है। इसलिए, साइबर हमलों की रोकथाम करने एवं उसे नियंत्रित करने के लिए साइबर सुरक्षा के मुद्दे पर चौतरफा काम करना बेहद जरूरी है। इस उद्देश्य के लिए, बड़ी तेजी से विकसित हो रहे इस खतरे से निपटने के लिए लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ क्षमता निर्माण करना भी आवश्यक है; लिहाजा पूरे देश में चलाया जा रहा यह अभियान डेटा में सेंध लगाने तथा लोगों की पहचान एवं डेटा की चोरी को कम करने की दिशा में उठाया गया एक कदम है।”
श्री राकेश माहेश्वरी, वैज्ञानिक एवं ग्रुप-कोऑर्डिनेटर, साइबर कानून व ई-सुरक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत सरकार, ने कहा: “टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में लगातार हो रहे इनोवेशन के साथ-साथ पूरी दुनिया में साइबर से जुड़े खतरों और हमलों में समान रूप से बढ़ोतरी हुई है। डिजिटल टेक्नोलॉजी और संचार के साधनों पर निर्भरता बढ़ी है, और इन साधनों के एक-दूसरे से जुड़े होने की वजह से इनका दुरुपयोग भी बढ़ा है। इन परिस्थितियों की वजह से साइबर सुरक्षा तेजुड़ी प्रक्रियाओं पर ज्यादा ध्यान देने के साथ-साथ अनुसंधान एवं नई खोज करने की जरूरत सामने आई है। हाल के दिनों में, इस महामारी के बीच भारत के साइबर सुरक्षा उद्योग का आकार में लगभग दोगुना हो गया है, लेकिन इस मामले पर लोगों की जागरूकता और क्षमता बढ़ाने के लिए बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। साइबर सुरक्षा के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए ट्रूकॉलर और साइबरपीस फाउंडेशन द्वारा साथ मिलकर पूरे देश में चलाया जा रहा यह अभियान उसी दिशा में उठाया गया एक सकारात्मक कदम है।”
गुवाहाटी के पुलिस आयुक्त, श्री हरमीत सिंह ने अपनी मौजूदगी से इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। उन्होंने कहा, “कोविड-19 महामारी की वजह से लोग अपने घरों की चारदीवारी में कैद होकर रहने के लिए मजबूर हो गए, और इसी वजह से लोगों द्वारा डिजिटल साधनों के इस्तेमाल का दायरा भी काफी बढ़ गया, जिसमें सामाजिक एवं शैक्षणिक क्षेत्र के साथ-साथ पैसों के लेन-देन के लिए डिजिटल साधनों का इस्तेमाल विशेष रूप से शामिल है।
आर्थिक लेन-देन के लिए डिजिटल साधनों पर निर्भरता बढ़ने की वजह से हमें साइबर धोखाधड़ी और ठगी के मामलों में बड़े पैमाने पर वृद्धि दिखाई दे रही है। टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में जितनी अधिक प्रगति होगी, गलत इरादों वाले ऐसे बाहरी तत्वों का दायरा भी उसी अनुपात में बढ़ेगा। कानून लागू करने वाली एजेंसियों के निरंतर प्रयासों के साथ-साथ आम नागरिकों को सशक्त बनाना और सभी को डिजिटल सुरक्षा का अनुभव प्रदान करना भी बेहद महत्त्वपूर्ण है। लोगों के बीच जागरूकता फैलाने और नागरिकों को सक्षम बनाने के लिए देश भर में शुरू किया गया यह कार्यक्रम, इस संबंध में एक बहुत बड़ा कदम होगा।”

