दीपोत्सव को रोशन करने के लिये कुम्हार बना रहे दीये

मेरठ रीजनदीपोत्सव को रोशन करने के लिये कुम्हार बना रहे दीये

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दीपोत्सव को रोशन करने के लिये कुम्हार बना रहे दीये

लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों को अंतिम रूप दे रहे मूर्तिकार

मेरठ। रोशनी के पर्व दीपावली पर मिट्टी के दिये जलाने की परंपरा है। माना जाता है कि मिट्टी के दीपक जलाने से परिवार में सुख और समृद्धि की बढ़ोतरी होती है। लोग भले ही मोमबत्ती या झालरों से जगमगाहट करें मगर मिट्टी के दीपक जलाकर परंपरा का पालन अवश्य करते हैं। ऐसे में दीपावली आते ही दीपक बनाने के लिये कुम्हारों का चाक तेजी से चलने लगता है।

दीपोत्सव को रोशन करने के लिये कुम्हार बना रहे दीये

कुम्हारों के घरों में इन दिनों दीपावली के लिये दीपक बनाये जा रहे हैं। परंपरा के साथ दीपावली मनाने के लिये मिट्टी के दीपक में सरसों का तेल डालकर बाती जलायी जाती है। झालरों या मोमबत्ती की रोशनी के मुकाबले दीपक की रोशनी मन को लुभाती है। वहीं इस साल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील की है जिसके चलते बाजारों में दीपक की मांग बढ़ गयी है। दुर्गा पूजा के बाद कुम्हारों को मिलने वाले आर्डरों की संख्या तेजी से बढ़ी है।

दीपोत्सव को रोशन करने के लिये कुम्हार बना रहे दीये

दीपोत्सव पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियों की स्थापना की जाती है। लोग दीपावली पर पूजन कर लक्ष्मी-गणेश की नयी मूर्तियों की पूजा करने के बाद उन्हें अपने घर-प्रतिष्ठान में पूजा स्थल पर रखते हैं। ऐसे में मूर्तिकारों के हाथ भी लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां बनाने में जुटे हैं। बाजारों में लगी दुकानों पर लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों के साथ मिट्टी के दिये, मिट्टी से बनी कलाकृतियां बिक रही हैं। कलश, परनी, कड़ाही, गणेश लक्ष्मी की मूर्ति, दीया बरनी खरीदने के प्रति भी लोगोें में उत्साह है।

दीपोत्सव को रोशन करने के लिये कुम्हार बना रहे दीये

हालांकि पिछले साल के मुकाबले मिट्टी से बने उत्पादों की कीमत अधिक है। कुम्हार और मूर्तिकार इसके पीछे मिट्टी का महंगा होना और उत्पाद बनाने में प्रयोग होने वाली सामग्री की कीमतों के साथ माल भाड़े में बढ़ोतरी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

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