- मेरठ देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर बना
- कोरोना कर रहा फेफड़ों पर जानलेवा हमला
सुनील शर्मा
न्यूज डेस्क। कोरोना संक्रमण से जुझ रहे मेरठवासियों के लिये प्रदूषण भी जानलेवा साबित हो रहा है। देश के दूसरे सबसे प्रदूषित शहर बन चुके मेरठ में प्रदूषण का असर लोगों के फेफड़ों पर पड़ रहा है। प्रदूषण से कमजोर फेफडे़ कोरोना संक्रमण का मुकाबला करने में नाकाम हो रहे हैं और इसका खामियाजा लोगों को जान देकर चुकाना पड़ रहा है।
वायु प्रदूषण के मामले में मेरठ 339 एक्यूआई के साथ दूसरे नंबर पर है। पहले नंबर पर 350 एक्यूआई के साथ पानीपत है और 328 एक्यूआई के साथ लखनऊ देश में तीसरे नंबर पर पहुंच गया है। मेरठ में प्रदूषण को रोकने की तमाम कोशिशें नाकामयाब साबित हो रही हैं।
ऐसे में बढ़ता प्रदूषण लोेगों के फेफड़ों को प्रभावित कर कमजोर बना रहा है। प्रदूषण के सूक्षम कण सांस द्वारा फेफड़ों तक पहुंच कर उनकी प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर बना देते हैं। प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने पर फेफड़ों में किसी भी प्रकार का संक्रमण होने की संभावना बन जाती है।
वहीं मेरठ में बढ़ते कोरोना संक्रमण का निशाना भी यही कमजोर फेफड़े बन रहे हैं। कोरोना संक्रमितों के रिकार्ड के अनुसार कोरोना मरीजों में से 60 प्रतिशत मरीजों के फेफड़े पहले से ही कमजोर थे।
यानी कमजोर फेफड़ों वालों को कोरोना तेजी से संक्रमित कर रहा है। कोरोना के कारण जान गंवाने वाले मरीजों में से अधिकांश की मौत फेफड़ों में फैले संक्रमण के कारण हुई है।
दरअसल कोरोना सबसे पहले फेफड़ों को संक्रमित करता है। संक्रमण शुरू होते ही मरीज को सांस लेने में तकलीफ शुरू हो जाती है। इसके साथ ही शरीर में ऑक्सीजन लेवल कम होता जाता है।
यदि मरीज के फेफडे़ पहले से ही कमजोर हैं तो कोरोना उसके लिये जानलेवा साबित हो जाता है। कोरोना संक्रमण के कारण हुई मौतों में 60 प्रतिशत मरीजों के फेफड़ों में संक्रमण फैल गया था जो उनके लिये जानलेवा साबित हुआ।
निर्माण कार्यों की धूल, वाहनों का धुआं है प्रदूषण का कारण
अनलाॅक में महानगर में रुके निर्माण कार्य शुरू हो गये हैं। निर्माण कार्य में सावधानी न बरती जाने से हवा में धूल बढ़ रही है। वहीं सड़कों पर बेतहाशा दौड़त वाहन भी प्रदूषण के स्तर मे इजाफा कर रहे हैं। इन दिनों हवा कम चलने और रात में पारा गिरने से भी प्रदूषण बढ़ रहा है।
कुछ दिन पहले जिला प्रशासन ने निर्देश दिए थे कि निर्माण कार्य स्थलों पर पानी का छिड़काव कर धूल उड़ने से रोकी जाए। निर्माण स्थल पर ग्रीन नेट लगाने समेत कई अन्य सावधानियां बरतने को कहा था।
कुछ दिनों तक नियमों का पालन होता दिखा लेकिन अब महानगर में विभिन्न जगहों पर चल रहे निर्माण कार्य स्थलों व मिट्टी से ढके गड्ढों में धूल उड़ती नजर आ रही है।

