नई दिल्ली। आरएसएस पहले बुरी नहीं थी। मुझे नहीं लगता कि आरएसएस बुरी है। अब भी आरएसएस में कई अच्छे और सच्चे लोग हैं और वे भाजपा को सपोर्ट नहीं करते। एक दिन वे अपनी चुप्पी तोड़ेंगे। पश्चिम बंगाल मुख्यमंत्री ममता बनजÊ का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर दिया ये बयान आजकल सुर्खियों में है। उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो को कांग्रेस और वामपंथी नेता चुटकी लेकर शेयर कर रहे है। लेकिन ऐसा नहीं है कि आरएसएस की ये तारीफ़ मुख्यमंत्री ममता बनजÊ ने पहली बार की है। एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने आरएसएस की तारीफ वाले इस बार का वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि साल 2003 में भी ममता बनजÊ ने आरएसएस को देशभक्त कहा था। बदले में आरएसएस ने उन्हें दुर्गा कहा। आरएसएस हिंदू राष्ट्र चाहती है। आरएसएस का इतिहास मुसलमान विरोधी से भरा है। ओवैसी ने कहा कि गुजरात दंगों के बाद ममता बनजÊ ने संसद में भाजपा सरकार का बचाव किया था। उन्होंने तंज़ करते हुए लिखा कि उम्मीद है कि टीएमसी के मुस्लिम नेता ममता बनजÊ की ईमानदारी को लेकर उनकी सराहना करेंगे।
ओवैसी ममता बनजÊ के 2003 वाले जिस देशभक्त वाले बयान का जिक्र कर रहे थे, वो भी दिलचस्प वाकया है। उस समय ममता बनजÊ एनडीए का हिस्सा थीं। उस समय उनको केंद्र सरकार में कोई पद भी नहीं मिला था। वो सितंबर 2003 का महीना था। कम्युनिस्ट टेररिज़्म की किताब के विमोचन के मौके पर उन्हें उस समय पाञ्चजन्य के संपादक तरुण विजय ने बुलाया था। मंच पर आरएएसएस के दिग्गज मौजूद थे। भाजपा के राज्यसभा सांसद बलबीर पुंज भी वहां थे। किताब के विमोचन में ममता बनजÊ ने मंच पर मौजूद नेताओं के सामने कहा था कि अगर आरएसएस एक फीसदी भी हमें सपोर्ट करे तो हम लाल आतंक से लड़ने में कामयाब होंगे। उस समय तरुण विजय ने ममता बनजÊ को मंच पर भाषण देने के लिए बुलाया तो उन्हें बंगाल की दुर्गा कह कर संबोधित किया था।
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2003 से 2022 तक लगभग 20 साल बीत चुके हैं। तब ममता बनजÊ बंगाल में वामपंथियों से लड़ रही थीं। बीस साल बाद अब वहां ममता बनजÊ की लड़ाई भाजपा से है। पश्चिम बंगाल में विपक्ष में वामपंथी और कांग्रेसी अब कहीं नहीं हैं। ना तो विधानसभा में और ना ही लोकसभा के चुनाव में। ऐसे में ओवैसी द्वारा आरएसएस पर दिया ममता बनजÊ का बीस साल पुराना बयान याद दिलाना बहुत बड़ी अहमियत रखता है। वहीं कुछ जानकारों का कहना है कि ओवैसी की बात मायने नहीं रखती। उनको तव्वजो देना जरूरी नहीं है। वो सिर्फ़ बंगाल के मुसलमानों को भड़काने के लिए कह रहे हैं।
पश्चिम बंगाल की राजनीति वहां केे मुसलमान वोटरों को नाराज़ करके नहीं की जा सकती। बंगाल की कुल आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी 30 फ़ीसद है। ये बात वहां का हर राजनेता और पश्चिम बंगाल का वोटर जानता ह। बंगाल में मुसलमान वोटरों की अहमियत जब सभी राजनैतिक दल जानते हैं तो क्या ममता बनजÊ नहीं जानती होंगी? ममता बनजÊ ने जो कहा है उसमें ऐसा कुछ नहीं है कि मुसलमान नाराज़ हो। उन्होंने केवल इतना कहा है कि आरएसएस में भी कुछ अच्छे लोग हैं। आरएसएस का ज़िक्र इस तरह से छेड़ना ममता की रणनीति का हिस्सा है। वो अपने राज्य की राजनीति कर रही हैं। उनको इस बात से फर्क़ नहीं पड़ता कि कौन विरोधी क्या कहता है। उनके बयान का विश्लेषण करने वालों का कहना है कि ममता अपने बयान से आरएसएस और भाजपा के बीच दरार पैदा करना चाहती हैं। ममता को लगता है कि इससे भाजपा राज्य में थोड़ा असहज होगी क्योंकि बंगाल में भाजपा की असली ताकत आरएसएस है।

